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EPFO का दावा- हर महीने 5.14 लाख लोगों को मिल रही नौकरी, मौजूदा वित्त वर्ष में नवंबर तक 62.38 लोगों को मिले जॉब

आंकड़े के अनुसार सितंबर 2017 से नवंबर 2019 तक ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में लगभग 1.39 करोड़ नए ग्राहक जोड़े गए। यह दिखाता है कि ये नौकरियां औपचारिक क्षेत्र में पिछले 27 महीनों में सृजित हुई थीं।

ईपीएफओ ने दावा किया है कि हर महीने 5.14 लाख लोगों को नौकरी मिल रही है। (फाइल फोटो)

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने रोजगार को लेकर एक नया डेटा जारी किया है। ईपीएफओ का दावा है कि हर महीने 5.14 लाख लोगों को नौकरी मिल रही है। मौजूदा वित्त वर्ष में नवंबर महीने तक 62.38 लोगों को औपचारिक क्षेत्र में नौकरी मिली है। साल 2019 में नवंबर महीने में 11.62 लाख लोगों को नौकरी मिली। वहीं ठीक इसी महीने साल 2018 में 4.3 लाख लोगों को नौकरी मिली थी। वहीं अक्टूबर 2019 में 6.48 लोगों को नौकरी मिली। हालांकि यह अंतिम डेटा नहीं है। ईपीएफओ हर महीने डेटा को संशोधित करता है।

बिजनेस टुडे में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि आंकड़े के अनुसार सितंबर 2017 से नवंबर 2019 तक ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में लगभग 1.39 करोड़ नए ग्राहक जोड़े गए। यह दिखाता है कि ये नौकरियां औपचारिक क्षेत्र में पिछले 27 महीनों में सृजित हुई थीं। सितंबर 2017 और मार्च 2018 के बीच 15.53 लाख नौकरियां सृजित की गईं। वित्त वर्ष 19 में 61.12 लाख नौकरियां सृजित की गईं, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष में नवंबर 2019 तक 62.38 लाख नौकरियां सृजित की गई हैं। आंकड़े के अनुसार हर महीने औसतन 5.14 लाख लोगों को नौकरी मिल रही है।

आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2018 से मार्च 2019 तक 61.12 लाख लोगों को रोजगार मिला। इसके बाद अप्रैल 2019 में छह लाख 44 हजार, मई में चार लाख 73 हजार, जून में सात लाख 96 हजार, जुलाई में आठ लाख 77 हजार, अगस्त में सात लाख 68 हजार, सितंबर में आठ लाख 68 हजार, अक्टूबर में छह लाख 48 हजार और नवंबर में 11 लाख लाख 63 हजार लोगों को नौकरियां मिली।

ईपीएफओ ने कहा कि डेटा अंतिम नहीं है क्योंकि कर्मचारियों के रिकार्ड का अपडेशन लगातार चलता रहता है। ईपीएफओ के अनुसार वर्तमान वित्तीय वर्ष में 4.89 लाख नौकरियों में कमी आई है। सबसे ज्यादा कमी जुलाई (94,889) और उसके बाद अक्टूबर (91,415) और सितंबर (80,686) महीने में हुई। हाल ही में, एसबीआई ने अपनी Ecowrap रिपोर्ट में कहा कि था कि आर्थिक विकास की धीमी गति नौकरी पर सीधा असर पड़ेगा। इसकी वजह से 2019-20 के दौरान कम से कम 16 लाख नौकरियां कम होंगी।

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