भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को रेपो दर का ऐलान किया। केंद्रीय बैंक ने बताया कि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आरबीआई द्वारा निर्धारित किया जाने वाला रेपो रेट 5.25% पर बना रहेगा। हालांकि, आरबीआई फरवरी 2025 से अब तक नीतिगत रेपो दर में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती कर चुका है। इसका मतलब है कि पहले से ही होम लोन लेने वाले को लाखों रुपये का फायदा हो रहा है।

रिजर्व बैंक ने कब-कब रेपो रेट में कटौती की है?

– फरवरी 2025 – 25 बेसिस प्वाइंट
– अप्रैल 2025 – 25 बेसिस प्वाइंट
– जून 2025 – 50 बेसिस प्वाइंट
– दिसंबर 2025 – 25 बेसिस प्वाइंट

50 लाख रुपये के लोन पर 7 लाख का फायदा

किसी व्यक्ति ने अगर 20 वर्ष के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है तो ब्याज दर में कमी से उसे बड़ी राहत मिल सकती है। उदाहरण के तौर पर, यदि लोन पर ब्याज दर 8.50% से घटकर 7.25% हो जाती है तो EMI और कुल ब्याज दोनों में कमी आती है।

8.50% ब्याज दर पर 50 लाख रुपये के लोन की मासिक EMI लगभग 43,391 रुपये बनती है। इस दर पर पूरे 20 साल में करीब 54.13 लाख रुपये का ब्याज देना पड़ता है।

लेकिन अगर ब्याज दर घटकर 7.25% हो जाए तो EMI घटकर करीब 39,519 रुपये रह जाती है। ऐसे में पूरे लोन अवधि में कुल ब्याज लगभग 44.84 लाख रुपये देना होगा।

इस तरह ब्याज दर कम होने से हर महीने लगभग 3,057 रुपये की EMI कम हो जाती है और पूरे लोन कार्यकाल में कुल मिलाकर करीब 7.33 लाख रुपये का ब्याज बच सकता है।

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Home Loan | Image Source: Gemini

75 लाख रुपये के होम लोन पर 14 लाख रुपये तक की बचत

किसी व्यक्ति ने अगर 20 साल के लिए 75 लाख रुपये का होम लोन लिया है तो ब्याज में कमी से उसे काफी राहत मिल सकती है। मान लें कि लोन की ब्याज दर 8.50% से घटकर 7.25% हो जाती है, तो EMI के साथ-साथ कुल ब्याज में भी काफी कमी आएगी।

अगर आप 8.50% ब्याज दर पर 75 लाख रुपये का लोन लेते है तो मासिक ईएमआई करीब 65,087 रुपये बनती है। ऐसे में आपको 20 वर्ष में लगभग 81.20 लाख रुपये देना पड़ता है।

लेकिन अगर ब्याज दर घट जाती है और ये 7.25% हो जाती है तो EMI घटकर करीब 59,278 रुपये हो सकती है और आपको 20 साल में कुल ब्याज लगभग 67.26 लाख रुपये देना होगा।

इससे आपकी EMI हर महीने करीब 5,809 रुपये कम हो जाती है और आपको लगभग 13.94 लाख रुपये की बचत हो सकती है।

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रेपो रेट स्थिर रखने के बावजूद होम लोनधारकों को मिल रहा फायदा

बैंक बाजार के सीईओ आदिल शेट्टी के अनुसार, रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट स्थिर रखने के बावजूद होम लोनधारकों को प्रीपेमेंट और लोन रीसेट के जरिए लाखों रुपये का फायदा मिल रहा है। रेपो-लिंक्ड प्रोडक्टों पर होम लोन लेने वालों को 2025 की शुरुआत से अब तक दी गई 125 बेसिस पॉइंट्स की राहत का फायदा पहले ही मिल रहा है।

आदिल शेट्टी के अनुसार, 50 लाख रुपये के 20 साल के लोन पर EMI में हर महीने लगभग 3,050 रुपये की बचत और पूरे लोन की अवधि में ब्याज में लगभग 7.34 रुपये लाख की बचत हो रही है। वहीं 75 लाख रुपये के लोन पर मासिक बचत लगभग 5,800 रुपये है और कुल ब्याज बचत लगभग 13.94 लाख रुपये है।

रेपो रेट क्या है?

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर आरबीआई जरूरत पड़ने पर बैंकों को अल्पकाल के लिए लोन देता है। अगर हम इसे आसान भाषा में समझें तो जब किसी बैंक को पैसों की कमी होती है, तो वह RBI से उधार लेता है। आरबीआई जिस ब्याज दर पर यह पैसा देता है, उसी को रेपो रेट कहा जाता है।

आम लोगों पर कैसे पड़ता है रेपो रेट में बदलाव का असर?

अगर रेपो रेट बढ़ता है तो फिर बैंकों के लिए पैसा महंगा होगा। जिससे होम लोन, कार लोन आदि महंगे हो सकते हैं। वही, रेपो रेट घटेगा तो बैंकों के लिए पैसा सस्ता होगा। जिससे लोन सस्ते हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, 5.25 प्रतिशत पर बरकरार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद रेपो दर का ऐलान कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया और अपने रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखा, जिससे संकेत मिलता है कि फिलहाल ब्याज दरों में तुरंत बदलाव की संभावना कम है। यहां पढ़ें पूरी खबर…

[ डिस्क्लेमर: ऊपर दिए गए आंकड़े केवल उदाहरण के लिए हैं और ब्याज दरों, अवधि तथा रेपो दर में बदलावों के पूर्ण प्रभाव से संबंधित मानक मान्यताओं पर आधारित हैं। असल लोन EMI, बचत और ब्याज की लागतें, लोन देने वाली संस्था की नीतियों, रीसेट की आवृत्ति, उधार लेने वाले की प्रोफ़ाइल और लोन की शर्तों के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं। पाठकों को व्यक्तिगत गणनाओं के लिए अपने वित्तीय सलाहकार या लोन देने वाली संस्था से सलाह लेनी चाहिए। ]