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रेपो दर 0.25 घट कर हुई छह फीसद, आवास ऋण हो सकते हैं सस्ते

रिवर्स रेपो दर में भी 0.25 फीसद कटौती की गई है जिसके बाद यह 5.75 फीसद रह गई है।

Author मुंबई | August 3, 2017 01:42 am
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

सरकार, उद्योग और बाजार की उम्मीदों के अनुरूप कदम उठाते हुए रिजर्व बैंक ने बुधवार को नीतिगत दर रेपो में 0.25 फीसद की कटौती कर उसे छह फीसद कर दिया। केंद्रीय बैंक ने कहा कि मुद्रास्फीति का जोखिम पहले से कम हुआ है। रेपो दर में कटौती के उसके कदम से आवास, वाहन और कंपनियों को दिए जाने वाले कर्ज के सस्ता होने की उम्मीद है। नतीजतन आवास कर्ज की ईएमआइ में अब कमी आएगी और ऐसे कर्जदार राहत महसूस करेंगे।  रेपो दर वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक अन्य बैंकों को उनकी फौरी जरूरत को पूरा करने के लिए नकदी उपलब्ध कराता है। चौथाई फीसद की कटौती के बाद रेपो दर छह फीसद रह गई है। पिछले साढ़े छह वर्ष में यह इसका सबसे निचला स्तर है। रिवर्स रेपो दर में भी 0.25 फीसद कटौती की गई है जिसके बाद यह 5.75 फीसद रह गई है। रिवर्स रेपो दर के तहत रिजर्व बैंक, बैंकिंग तंत्र से नकदी उठाता है। इसके साथ ही बैंकों की सीमांत स्थाई सुविधा (एमएसएफ) और बैंक दर भी घटकर 6.25 फीसद रह गईं।

रिजर्व बैंक ने इससे पहले रेपो दर में पिछले साल अक्तूबर में 0.25 फीसद की कटौती की थी। सितंबर 2016 में रिजर्व बैंक गवर्नर का कार्यभार संभालने के बाद उर्जित पटेल के नेतृत्व में यह पहली मौद्रिक समीक्षा थी। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के अस्तित्व में आने बाद वह उसकी पहली बैठक थी। उर्जित पटेल ने एमपीसी की बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि मौद्रिक नीति समिति का निर्णय उसके तटस्थ रुख के अनुरूप है। यह निर्णय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआइ) के दो फीसद ऊपर या नीचे रहने के दायरे के साथ इसे चार फीसद पर रखने के मध्यकालिक लक्ष्य को सामने रखते हुए लिया गया है। रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर में कटौती के बावजूद चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अपने लक्ष्य को 7.3 फीसद पर यथावत रखा है। वित्त मंत्रालय ने नीतिगत दर में कटौती के रिवर्ज बैंक के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे देश में व्याप्त संभावनाओं और नरम मुद्रास्फीति के साथ-साथ सतत आर्थिक वृद्धि हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने रिजर्व बैंक के इस कदम पर कहा कि मुद्रास्फीति को कम करने और आर्थिक वृद्धि की गति बनाए रखने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, शेयर बाजार में इसके बाद गिरावट दर्ज की गई। जानकारों का कहना है कि शेयर बाजार इस कटौती को पहले ही हजम कर चुका है। बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स बुधवार को रिकार्ड ऊंचाई को छूने के बाद 98.43 अंक गिरकर 32,476.74 अंक रह गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 33.15 अंक गिरकर 10,081.50 अंक पर बंद हुआ।

मूल्यवृद्धि के मामले में पटेल ने कहा कि एमपीसी का मानना है कि मुद्रास्फीति बेशक एतिहासिक निम्न स्तर पर पहुंच गई है। फिर भी स्पष्ट नहीं है कि यह गिरावट तात्कालिक या यह पक्के आधार के कारण है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति के मौजूदा निम्न स्तर से ऊपर उठने की आशंका बनी हुई है। यही वजह है कि एमपीसी ने नीतिगत उपायों में निरपेक्ष रुख को बरकरार रखने और आने वाले आंकड़ों पर नजर रखने का फैसला किया है। एमपीसी मुद्रास्फीति को दीर्घकालिक आधार पर चार फीसद के आसपास बनाए रखने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता पर ध्यान रखे हुए है। समिति ने निजी क्षेत्र के निवेश में नई जान फूंकने, ढांचागत क्षेत्र की अड़चनों को दूर करने और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सस्ते मकानों की योजना को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने की जरूरत बताई है। रिजर्व बैंक ने कहा कि कंपनियों के बड़े कर्जों का मामला सुलझाने और सार्वजिनक क्षेत्र के बैंकों में नए सिरे से पूंजी डालने के लिए वह सरकार के साथ नजदीकी से समन्वय बिठाते हुए काम कर रहा है। देश के बैंकों की गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) इस समय आठ लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एनपीए छह लाख करोड़ रुपए के आसपास है।

पटेल ने कहा कि एमपीसी मुद्रास्फीति की घटबढ़ पर नजर रखे हुए है और यह जानने की कोशिश में है कि हाल में इसमें आई नरमी अस्थाई है या फिर अधिक टिकाऊ अवस्फीति का दौर चल रहा है। बकौल पटेल एमपीसी ने वास्तविक गतिविधियों के अपने आकलन में इस बात पर गौर किया है कि कृषि क्षेत्र में परिदृश्य कुल मिलाकर बेहतर लगता है लेकिन उद्योग और सेवाओं के क्षेत्र में कंपनियों के क्षेत्र में निवेश मांग में कटौती के चलते स्थिति कमजोर लगती है। बैंकों के समक्ष दरों में कटौती की और गुंजाइश है। विशेषकर उन क्षेत्रों के लिए जहां पिछली कटौतियों का लाभ नहीं पहुंचा है। रिजर्व बैंक ने यह भी कहा है कि वह बैंकों की मौजूदा सीमांत लागत आधारित कर्ज दर व्यवस्था (एमसीएलआर) से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह अध्ययन कर रहा है और देख रहा है कि क्या वह इस व्यवस्था को बाजार से जुड़ी बेंचमार्क दर के अनुरूप कर सकता है। एमपीसी के चार सदस्य – रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल, डिप्टी गवर्नर वीरल वी आचार्य, चेतन घाटे और पामी दुआ ये सभी मौद्रिक नीति निर्णय के पक्ष में थे। एक अन्य सदस्य रविंद्र एच ढोलकिया ने नीतिगत दर में 0.50 फीसद कटौती के पक्ष में मत दिया। इसके अलावा रिजर्व बैंक के कार्यकारी निदशेक माइकल देबब्रत ने यथा स्थिति बनाए रखने पर जोर दिया।

 

क्या होता है रेपो रेट

रोजमर्रा के कामकाज के लिए बैंकों को भी बड़ी-बड़ी रकमों की जरूरत पड़ जाती है, और ऐसी स्थिति में उनके लिए देश के केंद्रीय बैंक, यानि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) से ऋण लेना सबसे आसान विकल्प होता है। इस तरह के एक रात के ऋण पर रिजर्व बैंक जिस दर से उनसे ब्याज वसूल करता है, उसे रेपो रेट कहते हैं।

 

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