इस वजह से भारत नहीं आ पा रही टेस्ला की इलेक्ट्रिक कार, एलन मस्क ने ट्विटर यूजर को दिया ये जवाब

Elon Musk: टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने इसी साल जनवरी में भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री की जानकारी दी थी। टेस्ला ने कारों की बिक्री के लिए बेंगलुरु में ऑफिस खोलकर कर्मचारी भी नियुक्त कर दिया है।

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टेस्ला की ओर से जमीन के तलाश की प्रक्रिया चल रही है

अमेरिका की दिग्गज इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माता कंपनी टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने भारत में एंट्री की घोषणा इसी साल जनवरी में की थी। हालांकि, अभी तक टेस्ला की गाड़ियां भारत नहीं आ पाई हैं। अब एलन मस्क ने टेस्ला की इलेक्ट्रिक कारों की भारत आने में हो रही देरी को लेकर खुलासा किया है।

दरअसल, एक ट्विटर यूजर ने एलन मस्क से टेस्ला की कारों को भारत में जल्द से जल्द लॉन्च करने की गुहार लगाई थी। इसके जवाब में मस्क ने कहा कि हम भी ऐसा करना चाहते हैं लेकिन यहां दुनिया के किसी भी बड़े देश के मुकाबले सबसे ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी है। इससे बड़ी बात यह है कि भारत में ग्रीन एनर्जी व्हीकल के साथ भी पेट्रोल और डीजल के समान व्यवहार किया जाता है। यह भारत के पर्यावरण लक्ष्यों के अनुरूप नहीं है।

इसी साल से शुरू हो सकती है टेस्ला की कारों की बिक्री: टेस्ला इसी साल से भारत में अपनी इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री शुरू कर सकती है। शुरुआत में आयात के जरिए कारों की बिक्री की जाएगी। यदि इसमें सफलता मिलती है तो कंपनी भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी लगाएगी। कारों की बिक्री को लेकर टेस्ला ने भारत में ऑफिस भी खोल दिया है।

सरकार से इंपोर्ट ड्यूटी घटाने की गुहार: टेस्ला ने भारत में इलेक्ट्रिक कारों पर लग रही इंपोर्ट ड्यूटी को घटाने की गुहार लगा रही है। हालांकि, इस मोर्च पर टेस्ला को झटका लग सकता है क्योंकि केंद्र सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई उत्पादों पर ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी लगा रही है। टेस्ला की वेबसाइट के मुताबिक, अमेरिका में केवल मॉडल-3 कार ही 40 हजार डॉलर से नीचे मिलती है।

40 हजार डॉलर से ज्यादा की कार पर लगता है 100 फीसदी टैक्स: अभी भारत में इंपोर्ट की जाने वाली कारों पर भारी-भरकम टैक्स लगता है। 40 हजार डॉलर से कम कीमत वाली कारों पर इसका 60 फीसदी टैक्स लगता है। वहीं 40 हजार डॉलर से ज्यादा कीमत की कारों पर इसका 100 फीसदी टैक्स लगता है।

40 फीसदी टैक्स लगाने की वकालत: टेस्ला ने सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग से कारों के इंपोर्ट पर 40 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगाने की वकालत की है। इसके पीछे तर्क यह है कि कम इंपोर्ट ड्यूटी लगाने से इलेक्ट्रिक कारें सस्ती हो जाएगी।

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