Economic Survey 2026: सरकार की लक्षित योजनाओं से गरीबी में काफी कमी आई है और आय वितरण में सुधार हुआ है। इससे सबसे निचली 5 से 10% आबादी के उपभोग व्यय में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। गुरुवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में यह कहा गया है। समीक्षा में सब्सिडी, पेंशन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा पर सार्वजनिक व्यय के सकारात्मक परिणामों का जिक्र किया है।

इन उपायों से कमजोर वर्ग अभाव से बाहर आए हैं। यह बात लेटेस्ट घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) 2023-24 से सामने आई है। इससे पता चलता है कि उपभोग असमानता में कमी और सबसे वंचित समूह को उल्लेखनीय लाभ हुआ है।

समीक्षा के अनुसार, 2022-23 और 2023-24 के बीच प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय (MPCE) में सबसे बड़ी वृद्धि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सबसे निचली पांच से 10% आबादी के बीच देखी गई। यह सरकारी नीतियों के सकारात्मक प्रभाव को बताती है।

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समीक्षा के अनुसार, “गरीबी के दुष्चक्र से कमजोर वर्ग को बाहर निकालने के लिए सरकार के उपायों का सकारात्मक परिणाम हुआ है, जो गरीबी कम करने के विभिन्न उपायों में प्रतिबिंबित होते हैं।”

इसमें कहा गया है कि सरकारी नीतियों का आय वितरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। मुख्य रूप से सब्सिडी, पेंशन, प्रत्यक्ष अंतरण और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा सहित सामाजिक सेवाओं पर सार्वजनिक व्यय के माध्यम से आय वितरण पर सकारात्मक असर दिखा है।

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समीक्षा में ग्रामीण भारत में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरण, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करते हुए स्थानीय अवसरों और नवोन्मेष के माध्यम से ग्रामीण आर्थिक गति को बढ़ाने का भी आह्वान किया गया है।

इसमें सबसे कमजोर वर्ग, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, उपभोग में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि आजीविका का समर्थन करने और जीवन स्तर को बिना किसी बाधा के बेहतर बनाने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार आवश्यक है।

समीक्षा में कहा गया, ”ग्रामीण समुदाय नए कौशल सीख सकता है, आजीविका प्राप्त कर सकता है, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता बनाए रख सकता है, घरेलू सामंजस्य बहाल कर सकता है, आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर सकता है और साथ ही सांस्कृतिक विरासत, जुड़ाव और पर्यावरण को संरक्षित कर सकता है।”

इसमें सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सामाजिक विकास को बनाए रखने पर जोर दिया गया है। साथ ही लक्षित, आंकड़ा-आधारित हस्तक्षेपों के लिए निरंतर प्रौद्योगिकी-आधारित सर्वेक्षणों की वकालत की गई है।

भाषा के इनपुट के साथ