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अर्थव्यवस्था में मुश्किलें अभी और भी हैं, वित्त वर्ष 2020 में 2 ट्रिलियन रुपये तक कम हो सकता है टैक्स रेवेन्यू

डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन भी इस साल महज 5 फीसदी बढ़ा है। इसका मतलब यह है कि बजट लक्ष्य के 17.3 फीसदी वृद्धि को हासिल करने के लिए दूसरी छमाही में इसमें कम से कम 27 फीसदी वृद्धि होनी चाहिए।

टैक्स रेवेन्यू कलेक्शन में कमी से राज्यों को संसाधनों का आवंटन कम होगा। (इलस्ट्रेशनः फाइनेंशियल एक्सप्रेस)

आर्थिक सुस्ती के बीच अर्थव्यवस्था की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मोदी सरकार के आंतरिक आंकलन से इस बात बात के संकेत मिले हैं कि मौजूदा वित्त वर्ष में ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू बजट अनुमान 24.6 लाख करोड़ से करीब 2 लाख करोड़ यानी 2 ट्रिलियन कम रह सकता है।

बिजनेस स्टैंडर्ड ने एक अधिकारी के हवाले से यह खबर प्रकाशित की है। खबर के अनुसार वित्त मंत्रालय ने मौजूदा आर्थिक सुस्ती के दौर में अर्थव्यवस्था से जुड़ी संशोधित जानकारी मांगी थी। मालूम हो कि साल 2018-19 में ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू अनुमानित 22.7 लाख करोड़ रुपये था। वहीं, आर्थिक समीक्षा के अनुसार वास्तविक प्राप्तियां 20.8 लाख करोड़ रुपये रही थीं। ऐसे में में रेवेन्यू से जुड़ी प्राप्तियां बजट अनुमान से 1.9 लाख करोड़ रुपये कम रहीं।

साल 2018-19 में जीडीपी की ग्रोथ रेट 6.8 फीसदी थी। खबर के अनुसार टैक्स रेवेन्यू कलेक्शन में कमी से राज्यों को संसाधनों का आवंटन कम होगा। इससे पहले 15वें वित्त आयोग में राज्यों के आवंटन में इसका महत्वपूर्ण योगदान था। साल 2019-20 के बजट डॉक्यूमेंट में ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू के 24.6 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है। वहीं, केंद्र का शुद्ध टैक्स रेवेन्यू 16.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

ऐसी स्थिति में यदि ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू करीब 2 लाख करोड़ रुपये कम रहता है तो केंद्र का शुद्ध टैक्स रेवेन्यू करीब 15.1 लाख करोड़ रुपये होगा। वहीं, राज्यों को जीएसटी कॉम्पनसेशन, इंटीग्रेटेड जीएसटी में राज्यों का हिस्सा आदि अन्य मद में 8.1 लाख करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान है।

डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन भी इस साल महज 5 फीसदी बढ़ा है। इसका मतलब यह है कि बजट लक्ष्य के 17.3 फीसदी वृद्धि को हासिल करने के लिए दूसरी छमाही में इसमें कम से कम 27 फीसदी वृद्धि होनी चाहिए। इस बार जीएसटी कलेक्शन में भी कमी का अंदेशा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में कॉरपोरेट टैक्स घटाने का ऐलान किया है। इससे भी रेवेन्यू कलेक्शन में कमी आ सकती है।

हालांकि वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि सरकार पूंजीगत व्यय से समझौता किए बिना राजकोषीय घाटे के जीडीपी का 3.3 फीसदी रखने के लक्ष्य को हासिल करेगी। 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें 1 अप्रैल, 2020 से लागू होंगी और 31 मार्च, 2025 तक चलेंगी। 15वां वित्त आयोग 30 नवंबर तक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप सकता है।

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