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अब सरकारी उपक्रम भी जबर्दस्त नकदी संकट में! BHEL, SAIL, HAL में लीव इनकैशमेंट पर रोक, BSNL करेगा सैलरी में कटौती

भेल के प्रवक्ता गोपाल सुतार के हवाले से बताया गया कि कंपनी ने लीव एनकैशमेंट को मितव्ययिता के उपाय के तहत स्थगित किया है। यह सिर्फ उन कर्मचारियों का रोका गया है जो अभी सर्विस में हैं।

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आर्थिक मंदी के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर भी देखने को मिल रहा है। देश के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में नकदी संकट का सामना करना पड़ रहा है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की खबर के अनुसार मंदी के कारण भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में नकदी का प्रवाह बढ़ाने के लिए कर्मचारियों को भुगतान किए जाने वाले लीव एनकैशमेंट को स्थगित कर दिया है। वहीं, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने पिछले 2-3 साल से लीव एनकैशमेंट पर रोक लगा रखी है।

खबर के अनुसार भेल ने अपने कर्मचारियों से कहा है कि मैन्युफैक्टरिंग ऑपरेशंस चलाने के लिए उसे मौजूदा फंड का उपयुक्त तरीके से प्रयोग करना है। बाजार में मांग घटने का असर इन कंपनियों के साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी सीधा देखने को मिल रहा है। खबर में भेल के प्रवक्ता गोपाल सुतार के हवाले से बताया गया कि कंपनी ने लीव एनकैशमेंट को मितव्ययिता के उपाय के तहत स्थगित किया है। यह सिर्फ उन कर्मचारियों का रोका गया है जो अभी सर्विस में हैं।

रिटायर होने वाले कर्मचारियों को लीव एनकैशमेंट समेत पूरे वित्तीय लाभ का भुगतान किया जा रहा है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि निकट भविष्य में हमें स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है। नकदी संकट की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एचएएल को अपने कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने के लिए बैंक से एडवांस लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।

वहीं बीएसएनल ने भी लैंडलाइन और ब्रॉडबैंड लगाने के निर्धारित लक्ष्य से चूकने पर अधिकारियों पर जुर्माना लगाना शुरू कर दिया है। यह जुर्माना सितंबर माह की सैलरी से काटा जाएगा। सरकार दूरसंचार कंपनी का कहना है यदि कर्मचारी अगले महीने में अपना पिछला टार्गेट पूरा कर लेते हुए तो उनके वेतन से की गई कटौती को वापस कर दिया जाएगा।

कोल इंडिया की एक सहायक साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड कंपनी के बोर्ड ने वरिष्ठ अधिकारियों के अगस्त की सैलरी से 25 फीसदी तक की कटौती जैसे कदम उठाने पर भी विचार किया गया। हालांकि, इस प्रस्ताव को बाद में खारिज कर दिया गया। कंपनी की तरफ से ऑडिट कमेटी की तरफ से यह सिफारिश जून में खत्म हुई तिमाही में कंपनी के खराब प्रदर्शन को देखते हुए पेश किया गया था।

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