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अब इस सेक्टर पर मंडराया खतरा, 2 लाख 60 हजार से ज्यादा लोगों की छिन सकती हैं नौकरियां

देश के माइनिंग सेक्टर (पेट्रोलियम और नैचुरल गैस को छोड़कर) ने 2.32 मिलियन को सीधे रोजगार दिया और 23 मिलियन की आजीविका को बनाए रखा।

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इकनॉमिक स्लोडाउन (मंदी) का असर माइनिंग सेक्टर पर भी दिखने लगा है। इस सेक्टर में काम कर रहे 2 लाख 60 हजार से ज्यादा लोगों की नौकरी पर खतरा मंडर रहा है। माना जा रहा है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मर्चेंट माइन्स के बंद होने से इतनी बड़ी तादाद में लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा सकता है। यह खबर ऐसे समय पर आई है जब देश बेरोजगारी के मोर्चे पर 40 साल के अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है।

नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन (एनएसएसओ) के डाटा के मुताबिक बेरोजगारी की दर 2011-12 में 2.2 प्रतिशत से बढ़कर 2017-18 में 6.1 प्रतिशत हो गई, जबकि कर्मचारियों की संख्या 47 मिलियन घट गई। वहीं इस दौरान श्रम बल की भागीदारी दर 55.9 प्रतिशत से घटकर 49.8 प्रतिशत हो गई। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक खबर के मुताबिक अगले साल मार्च तक 329 खनन पट्टों की वैधता समाप्त हो रही है जिससे 264,000 नौकरियां जाने का खतरा है। वहीं लैप्सिंग माइन्स की सूची में 48 ऑपरेटिव पट्टे हैं, जिनके बंद होने से कच्चे माल की आपूर्ति में लगभग 60 मिलियन टन (एमटी) की कमी होगी। विशेषकर लौह अयस्क सेक्टर में माल की आपूर्ति में सबसे ज्यादा कमी होगी।

वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के ओडिशा, झारखंड, गोवा और कर्नाटक में खनन पर आदेश से लगभग 200,000 लोगों की नौकरी पहले ही छिन चुकी है। फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज (फीमी) के जनरल सेक्रेटरी आर के शर्मा के मुताबिक माइनिंग सेक्टर में मौजूदा मांग की लोच 0.52 प्रतिशत है जो कि कृषि क्षेत्र से कहीं ज्यादा है। यह सेक्टर कृषि सेक्टर की तुलना में 13 गुना ज्यादा रोजगार सृजन करता है। जीडीपी में हर 1 प्रतिशत की वृद्धि के लिए विनिर्माण क्षेत्र की तुलना में छह गुना अधिक रोजगार पैदा कर सकता है, जो अपेक्षाकृत उच्च रोजगार सृजन क्षमता की ओर इशारा करता है।’

मालूम हो कि देश के माइनिंग सेक्टर (पेट्रोलियम और नैचुरल गैस को छोड़कर) ने 2.32 मिलियन को सीधे रोजगार दिया और 23 मिलियन की आजीविका को बनाए रखा। हालांकि मंदी की मार से अन्य सेक्टर भी बुरी तरह प्रभावित हैं। कई हजार लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है। ऑटोमोबाइल सेक्टर मंदी की मार से बुरी तरह प्रभावित है। मोदी सरकार ने हाल ही में वाहन उद्योग को इस संकट से उबारने के लिए कई कदम उठाए थे, हालांकि इस तुरंत असर पड़ते नहीं दिख रहा। अगस्त महीने में गाड़ियों की बिक्री के जो आंकड़े आए हैं, उसने ऑटोमोबाइल कंपनियों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। कुछ कंपनियों की सेल में तो 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।

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