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जीएसटी घटने के बाद भी होटल वाले पकड़ा रहे हैं ज्‍यादा ब‍िल तो आप ऐसे स‍िखा सकते हैं सबक

मुनाफाखोरी स्थानीय प्रकृति की है तो इसकी शिकायत स्थायी समित से या फिर राज्य स्तरीय जांच समिति से कर सकते हैं।
महानिदेशालय आम तौर पर किसी शिकायत की जांच में दो से तीन महीने का समय लगाता है और शिकायत को फिर से मुनाफारोधी प्राधिकरण के पास भेज दिया जाता है।

आप होटल में खाना खाते हैं और आपके पास बिल आता है, आप बिल देखते हैं, बिल में पाते हैं की इसमें तो जीएसटी की दरें अभी भी वही हैं जो कि कम करने से पहले थीं। तो आप इसकी औपचारिक एंटी-प्राफटिरिंग शिकायत कर सकते हैं। हालांकि यह प्रक्रिया सरल नहीं है।
इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड ने अपनी वेबसाइट पर एंटी-प्राफटिरिंग आवेदन फॉर्म अपलोड किया है ताकि संभावित शिकायतकर्ता इसका उपयोग कर सकें।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा जारी किए गए फॉर्म को देखें तो इसमें शिकायत फॉर्म भरते वक्त काफी डिटेल्स देनी होंगी। इसके लिए होटल का जीएसटी नंबर, उसका नामकरण कोड, आपके होटल में दिए गए बिल पर कितना टैक्स लिया गया और पहले कितना था, अब कितना है आदि डालना होगा। इसके साथ दूसरे डॉक्यूमेंट भी देने होंगे जैसे सेल्फ अटेस्टेड आईडी प्रूफ, इनवॉइस, रेट लिस्ट आदि। शिकायतकर्ता को इसके साथ घोषित करना होगा कि उसने जो जानकारी दी है वह सही है। इसके साथ लगाए गए सभी डॉक्यूमेंट सही हैं। इसे दाखिल करते हुए शिकायतकर्ता को पूरी सावधानी बरतनी होगी।

सीबीईसी के अनुसार, एक प्रभावित उपभोक्ता निर्धारित प्रारूप में एंटी-प्राफटिरिंग की स्थायी समिति के सामने आवेदन कर सकता है। यदि मुनाफाखोरी स्थानीय प्रकृति की है तो इसकी शिकायत स्थायी समित या फिर राज्य स्तरीय जांच समिति से की जा सकती है। यह दोनों संस्थाएं उपभोक्ता द्वारा की गई शिकायत की शुरुआती जांच करती हैं। पहला लेवल पूरा होने पर, शिकायत सही पाए जाने पर और प्रूफ मिलने पर यह कमेटी शिकायत को आगे की जांच के लिए रक्षा उपायों के महानिदेशक (सीबीईसी) के पास भेज देती हैं।

महानिदेशालय आम तौर पर किसी शिकायत की जांच में दो से तीन महीने का समय लगाता है और शिकायत को फिर से मुनाफारोधी प्राधिकरण के पास भेज दिया जाता है। फाइनल निर्णय के लिए महानिदेशक शिकायत की रिपोर्ट नेशनल एंटी-प्राफटिरिंग प्राधिकरण के पास भेज देते हैं। नेशनल एंटी-प्राफटिरिंग अथॉरिटी देखेगी कि यह वास्तव में सही है और इसके बाद यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उपभोक्ता को घटी हुई कीमतों पर ही भुगतान करना पड़े।

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