ताज़ा खबर
 

जेब पर भारी पड़ेगा तत्काल का गणित

नई दिल्ली। पहले ही प्रीमियम सेवा के नाम पर लोगों से कई गुणा अधिक किराया वसूलने वाले रेलवे ने अब तत्काल कोटे के 50 फीसद टिकटों के किराए बढ़ाने का फैसला किया है। रेलवे की नई व्यवस्था के तहत तत्काल कोटे के टिकटों की बुकिंग गतिशील किराया प्रणाली से जोड़ने का फैसला किया गया है। […]

नई दिल्ली। पहले ही प्रीमियम सेवा के नाम पर लोगों से कई गुणा अधिक किराया वसूलने वाले रेलवे ने अब तत्काल कोटे के 50 फीसद टिकटों के किराए बढ़ाने का फैसला किया है। रेलवे की नई व्यवस्था के तहत तत्काल कोटे के टिकटों की बुकिंग गतिशील किराया प्रणाली से जोड़ने का फैसला किया गया है। इससे तत्काल टिकटों के दाम बढ़ जाएंगे। यानी इसका किराया बढ़कर मौजूदा तत्काल किराए से तीन गुणा अधिक हो जाएगा।

उत्तर रेलवे ने जिन ट्रेनों के तत्काल टिकटों के किराए बढ़ाने का फैसला किया है उनमें सप्तक्रांति, स्वतंत्रता सेनानी, अगस्त क्रांति वैशाली और मुंबई राजधानी शामिल है। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नीरज शर्मा ने कहा है कि जो ट्रेनें अधिक भीड़भाड़ वाली हैं यानी जिन ट्रेनों में सफर करना लोग ज्यादा पसंद करते हैं उनकी पहचान कर उनके किराए बढ़ाने का फैसला किया किया गया है ताकि इसमें मारामारी कम हो और दूसरी ट्रेनें भी लोकप्रिय हों।

किराए और बढ़ाने पर रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि यह तय किया गया है कि मौजूदा तत्काल कोटे के टिकट का 50 फीसद हिस्सा गतिशील किराया योजना के तहत बेचा जाएगा। यानी मौजूदा तत्काल योजना के तत्काल कोटे का शुरू का 50 फीसद टिकट बुक हो जाने के बाद बाकी 50 फीसद टिकट गतिशील किराए के आधार पर बेचे जाएंगे। यानी ज्यादा मांग पर ज्यादा किराया। जैसे-जैसे टिकटों की संख्या बढ़ती जाएगी वैसे-वैसे किराए में इजाफा होता जाएगा।

यह इंतजाम इस तरह से किया गया है कि इस कोटे की आखिरी बिकी सीट का किराया तत्काल के किराए का तीन गुणा होगा। बाकी के 50 फीसद टिकट प्रीमियम तत्काल कोटे के तहत आएंगे। एक तरह से यह तत्काल के टिकटों को भी प्रीमियम के दायरे में लाने की कोशिश कही जा सकती है। इससे पहले कई प्रीमियम ट्रेनों के किराए अधिक होने से कई प्रीमियम ट्रेनें खाली भी चली हैं।

प्रीमियम का किराया पहले ही तत्काल के किराए से करीब चार गुणा अधिक है। प्रीमियम तत्काल कोटा टिकट योजना एक अक्तूबर से लागू है। अभी यह 80 ट्रेनों में चालू की गई है। उसके लिए टिकट ऑनलाइन ही उपलब्ध है। अधिकारी ने कहा कि सभी जोनों को अपने-अपने जोन में पांच लोकप्रिय ट्रेनों की पहचान करने को कहा गया है।

त्योहार के दौरान टिकट की भारी मारामारी होती है क्योंकि यात्री दशहरा व दिवाली मनाने अपने घर या प्रियजनों के पास जाना पसंद करते हैं। त्योहारों के ठीक पहले ऐसे फैसले से रेलवे की मंशा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि रेलवे का कहना है कि यह दलालों से निपटने के लिए किए गए उपाय हैं।

 

 

Next Stories
1 कोयला मंत्रालय ने खदानों के बारे में कानून मंत्रालय से मांगा स्पष्टीकरण
2 भेल को एनएमडीसी से मिला 359 करोड़ रुपए का आर्डर
3 भारत का स्वर्ण आयात बढ़कर 75 टन प्रति माह हो सकता है
ये पढ़ा क्या?
X