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PARLE-G के पैक पर दिखने वाली बच्ची को पहचानते हैं? पढ़ें इस बिस्कुट कंपनी का दिलचस्प सफर

बच्ची की तस्वीर के लिए तीन महिलाओं के नाम सामने आते रहे हैं। इनमें नागपुर की नीरू देशपांडे, गुंजन गंडानिया और आईटी इंडस्ट्रियलिस्ट नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति शामिल है, पर पैकेट पर दिखने वाली बच्ची की तस्वीर का वास्ता इन तीनों में से किसी से नहीं है।

Author नई दिल्ली | Updated: August 21, 2019 7:17 PM
पारले जी बिस्किट (साभार-सोशल मीडिया)

पारले जी बिस्किट के रैपर पर बनी प्यारी सी बच्ची को लेकर मीडिया में कई तरह की खबरें आ चुकी हैं। इस तस्वीर के लिए तीन महिलाओं के नाम सामने आते रहे हैं- नागपुर की नीरू देशपांडे, गुंजन गंडानिया और आईटी इंडस्ट्रियलिस्ट नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति लेकिन अफवाहों का बाजार गर्म होने पर पारले के प्रोडक्ट मैनेजर ने साफ किया था कि पैकेट पर दिखने वाली बच्ची की तस्वीर का वास्ता किसी से नहीं है, उसे उकेरा भर गया है।

मगनलाल दहिया नाम के चित्रकार ने 60 के दशक में तस्वीर को बनाया था। हालांकि नीरू देशपांडे को फोटो के लिए मीडिया में खूब सुर्खियां मिलीं। कहा गया कि जब नीरू 3-4 साल की थीं, तब उनके पिता ने यूं ही उनकी फोटो खींची थी। वह प्रफोशनल फोटोग्रफर नहीं थे लेकिन उनकी खींची तस्वीर को खूब पसंद किया गया। एक दिन पारले वालों से ताल्लुक रखने वाले एक शख्स के हाथ वह तस्वीर लग गई और फिर पैकेट के रैपर पर छप गई।

इंटरनेट से प्राप्त जानकारी के मुताबिक पारले जी एक भारतीय कंपनी है जिसकी शुरुआत अंग्रेजों के जमाने में हो गई थी। मुंबई के विले पारले के एक चौहान परिवार ने 1929 में कंपनी शुरू की थी। कंपनी शुरू में केक, पेस्ट्री और कुकीज बनाती थी लेकिन बाजार में अंग्रेजी कंपनियों के बिस्किट की बिक्री को देखते हुए पारले ने भी 1939 में बिस्किट बनाना शुरू कर दिया।

सस्ता और गुणवत्ता पूर्ण होने के कारण पारले बिस्किट हिट हो गया। बहुत संभव है कि उस वक्त स्वतंत्रता आंदोलन की लड़ाई लड़ रहे लोगों ने भी छोटी-मोटी भूख मिटाने के लिए पारले जी खाया हो।

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1980 तक यह बिस्किट ‘पारले ग्लूको’ के नाम से बिकता रहा। फिर इसमें ग्लूको की जगह ‘जी’ ने ले ली। बाद में जी फॉर जीनियस हो गया। एक समय बिस्किट के पैकेट पर गांयों और ग्वालिन की तस्वीरें दिखाई देती थीं लेकिन 60 के दशक में उनकी जगह एक प्यारी से बच्ची ने ले ली, जिसका जिक्र हम ऊपर कर चुके हैं। अर्से तक बिस्किट वैक्स पेपर के रैपर में आता रहा लेकिन बाद में यह प्लास्टिक के रैपर में आने लगा।

साल 2011 में नीलसन सर्वे ने पारले जी को दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट करार दिया था। 2013 में, पारले-जी खुदरा बिक्री में 5,000 करोड़ रुपये आंकड़ा पार कर भारत का पहला घरेलू एफएमसीजी ब्रांड बन गया। पारले जी का स्वाद आज भी लोगों की जुबां पर चढ़ा हुआ है।

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