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नोटबंदी के बाद कालाधन और भ्रष्‍टाचार के खिलाफ दूसरा बड़ा हथियार चलाने की तैयारी में मोदी सरकार

नीरव मोदी प्रकरण के बाद कंपनी मामलों के मंत्रालय ने कंपनी निदेशकों का पासपोर्ट रिकॉर्ड और अन्य पर्सनल इन्फारमेशन सालाना आधार पर लेने का फैसला किया है ताकि फर्जीवाड़े या अन्य वित्तीय गड़बड़ी के मामले में आरोपी जल्द से जल्द मंत्रालय के राडार में आ सके।

फॉर्म में कंपनी के डायरेक्टर का पूरा विवरण, पासपोर्ट नंबर, पैन नंबर, मोबाइल नंबर, ई-मेल और पता दर्ज कराना होगा। इसे आरओसी की वेबसाइट पर कंपनी सेक्रेटरी या चार्टर्ड अकाउंटेटंट सालाना आर्थिक रिपोर्ट अपलोड करते वक्त शामिल करेंगे।

नोटबंदी के बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार देश में कॉरपोरेट करप्शन और कालाधन पर रोक लगाने के लिए दूसरा बड़ा हथियार चलाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय शेल कंपनियों पर नकेल कसने और कंपनियों में डायरेक्टर्स को और अधिक जिम्मेदार बनाने और कॉरपोरेट जगत में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से नया केवाईसी योजना शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत कंपनियों के सभी डायरेक्टर्स को अपना पासपोर्ट डिटेल, पैन नंबर और कॉन्टैक्ट डिटेल्स सालाना देना होगा। बता दें कि हर कंपनी को सालाना आर्थिक प्रतिवेदन रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के दफ्तर में फाइल करना होता है। इस प्रक्रिया में मंत्रालय ने दो नए नए छोटे फॉर्म जोड़े हैं।

पहले फॉर्म में कंपनी के डायरेक्टर का पूरा विवरण, पासपोर्ट नंबर, पैन नंबर, मोबाइल नंबर, ई-मेल और पता दर्ज कराना होगा। इसे आरओसी की वेबसाइट पर कंपनी सेक्रेटरी या चार्टर्ड अकाउंटेटंट सालाना आर्थिक रिपोर्ट अपलोड करते वक्त शामिल करेंगे। दूसरे फॉर्म में कंपनी का भौतिक सत्यापन तराना होगा यानी कंपनी जिस पते पर कार्यशील होगी उसे दर्ज कराना होगा। इससे कंपनी तक विभागीय पहुंच आसान हो सकेगी। इस फॉर्म को भी कंपनी सेक्रेटरी या चार्टर्ड अकाउंटेंट सालाना आर्थिक प्रतिवेदव जमा करते समय अपलोड करेंगे। सरकार का मानना है कि कि इस मुहिम से शेल कंपनियों पर रोक लगाई जा सकेगी।

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में सचिव इनजेति श्रीनिवास ने ईटी नाऊ से कहा कि इस मुहिम से देश के 33 लाख कंपनी निदेशकों का विवरण सरकार के पास रजिस्टर्ड हो सकेगा। उन्होंने बताया कि विदेशी निदेशकों के केवाईसी के लिए अलग तरह का फॉर्म होगा। हालांकि, उन्हें भी कॉरपोरेट मंत्रालय के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा। उन्होंने बताया कि इस महामुहिम को कभी भी शुरू किया जा सकता है। बता दें कि नीरव मोदी प्रकरण के बाद कंपनी मामलों के मंत्रालय ने कंपनी निदेशकों का पासपोर्ट रिकॉर्ड और अन्य पर्सनल इन्फारमेशन सालाना आधार पर लेने का फैसला किया है ताकि फर्जीवाड़े या अन्य वित्तीय गड़बड़ी के मामले में आरोपी जल्द से जल्द मंत्रालय के राडार में आ सके।

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