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नाेटबंदी के बावजूद बैंकों की हालत खराब, तीन साल में 18 अरब डालर की जरूरत

रिजर्व बैंक के अांकड़ों के मुताबिक बैंकिंग प्रणाली का बकाया कर्ज 25 नवंबर को 72.92 लाख करोड़ रुपए था।

बैंक के सामने मौजूद भीड़।

भारत में वृहद स्तर पर बैंकों के पास पूंजी की कमी की समस्या अभी बनी रहेगी। एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की बैंकिंग प्रणाली को अगले तीन साल में 1.2 लाख करोड़ रुपए या 18 अरब डालर की अतिरिक्त पूंजी की जरूरत होगी। प्रबंधन सलाहकार कंपनी ओलिवर वेमैन की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘संसाधन की कमी से जूझ रही दुनिया में बैंकों को अपनी पूंजी तथा जोखिम रिटर्न प्रोफाइल के प्रबंधन के लिए मजबूती से प्रयास करना होगा।’’ इसमें कहा गया है कि अगले तीन साल में बैंकिंग प्रणाली को 1.2 लाख करोड़ रुपए अतिरिक्त पूंजी की जरूरत होगी। संपत्ति गुणवत्ता की मान्यता, रिण की मांग और नए नियमन (आईएफआरएस 9 तथा बासेल) के प्रभाव की वजह से अतिरिक्त पूंजी की जरूरत होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि बैंक सफलतापूर्वक मौजूदा दबाव को झेल जाते हैं तथा अपने कारोबारी माडल को नए सिरे से तय करते हैं, तो उनके लिए भारी अवसर होंगे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आमदनी में कमी तथा पूंजी की अड़चन की वजह से बैंक नई प्रौद्योगिकियों में निवेश नहीं कर पा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा अवसर लघु एवं मझोले उपक्रमों के साथ हैं जो अनुमानत: 140 अरब डालर के हैं। ऊंची लागत की वजह से अभी इस क्षेत्र का पूरा दोहन नहीं हो पा रहा है।

बड़े नोटों को अमान्य किए जाने के एलान के बाद मांग में भारी गिरावट की वजह से 25 नवंबर को खत्म पखवाड़े में बैंक कर्ज में 61 हजार करोड़ रुपए की गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक कर्जदारों ने इस अवधि में 66,000 करोड़ रुपए बैंकों में जमा भी कराए हैं। कुछ डिफाल्ट खातों में कर्ज भुगतान किया गया।

रिजर्व बैंक के अांकड़ों के मुताबिक बैंकिंग प्रणाली का बकाया कर्ज 25 नवंबर को 72.92 लाख करोड़ रुपए था। पांच सौ और एक हजार रुपए के नोटों को अमान्य करने का एलान आठ नवंबर को किया गया। नौ नवंबर से 25 दिसंबर तक के पखवाड़े में बैंकों में 4.03 लाख करोड़ रुपए की राशि जमा कराई गई।

सरकार के नोटबंदी के कदम का समर्थन करने वालों का शुरू में मानना था कि अप्रचलित किए गए 15.4 लाख करोड़ रुपए मूल्य के नोटों में से कम से कम 20 प्रतिशत या तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक राशि वापस नहीं आने वाली है और इससे सरकार को भारी फायदा होने जा रहा है।

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