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मियाद खत्म, भीड़ कम लेकिन हालात सामान्य नहीं

नोटबंदी पर सरकारी फैसलों के बीच जैसे-तैसे पचास दिन का वक्त तो बीत गया लेकिन नकदी के लिए अब भी लोग एटीएम की लाइन में लग रहे हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: December 31, 2016 2:00 AM

नोटबंदी पर सरकारी फैसलों के बीच जैसे-तैसे पचास दिन का वक्त तो बीत गया लेकिन नकदी के लिए अब भी लोग एटीएम की लाइन में लग रहे हैं। शुक्रवार को नोटबंदी की मियाद खत्म होने पर लोगों का कहना है कि सरकार ने इस दौरान फर्जी नोट, कालाधन और नकदीरहित पर फैसले तो किए, लेकिन मियाद पूरी होने तक एटीएम की भीड़ से पाला पड़ना नहीं छूटा। लोगों का कहना था कि नकदीरहित कीतमाम कोशिशों के बाद छोटे-मोटे खर्चों में नकदी की जरूरत तो होती है। लोगों का एटीएम आना छूटेगा नहीं बस ऐसे में लंबी लाइन कुछ छोटी हुई है। स्थिति सामान्य होने का वादा पूरा नहीं हुआ है।

आइटी क्षेत्र में काम करने वाले अनिल राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर एसबीआइ के एटीएम पर 20-22 लोगों के सबसे अखिर में खड़े थे। उनका कहना था कि 50 दिन का समय पूरा होने के बाद भी वैसी स्थितियां नहीं हैं, जो समय मांगते समय सरकार का वादा था। अभी भी नकदी के लिए एटीएम खोजना पड़ रहा है और पता लगाना पड़ रहा है कि कब पैसा डलेगा।

तब तक राजीव चौक के उस एटीएम पर अनिल के पीछे पांच से सात लोग और खड़े हो चुके थे। एक्सिस बैंक के एटीएम के बाहर खड़े लोगों का भी यही कहना था कि नोटबंदी की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही। कतार में लगे मोहित का कहना था कि सरकार का ध्यान आम आदमी की समस्या पर कम है। उन्होंने सरकार की तरफ से पैसे कम छापने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि देश में ज्यादातर लोग नकदी व्यवहार करते हैं ऐसे में नकद कम छापने का तुक समझ नहीं आ रहा है। सरकार की तरफ से नोटबदली के फैसले पर तो साथ हूं लेकिन नकदी कम छापने के मुद्दे पर कतई नहीं होऊंगा। वहीं कनॉट प्लेस में दोपहर दो बजे के करीब एटीएम पर कुछ खास भीड़ नहीं थी। लेकिन इनर सर्किल में मौजूद पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी), एचडीएफसी और यूनियन बैंक के एटीएम पर बारह से पंद्रह लोग खड़े थे। इन एटीएम पर लगने वाली लंबी कतार में शुक्रवार को थोड़ा अंतर जरूर था। पीएनबी के एटीएम की कतार में खड़ी दिप्ती छठे, सातवें नंबर पर थीं। उनका कहना था कि भीड़ में बहुत कमी आई है। उनका कहना था कि इस समय आज इस पीएनबी के एटीएम पर नोटंबदी की सबसे कम भीड़ करार दे सकते हैं।

भारत की इतनी बड़ी नकदी व्यवस्था में किसी आमूलचूल बदलाव के बाद असर कम होने में समय तो लगेगा। भीड़ में छटनी इस बात का संकेत मान सकते हैं कि हालात सुधरे हैं। उनका कहना था कि अब स्थिति संभल गई है बस सरकार को ऐसे कदम उठाने की जरूरत है, जिससे उसका रुतबा बढ़े। अब भी नोटबंदी के मुद्दे पर लोगों का साथ मिलने के बाद सरकार की व्यवस्था के नाम पर आलोचना ही हुई है, अब व्यवस्था को सामान्य करने के साथ सरकार को जमीन, सोने, विदेशी मुद्रा पर कड़े प्रहार करने की जरूरत है। नहीं तो 50 दिनों तक और अभी आगे भी नोटबंदी से होने वाले असर को झेलने वाली जनता का विश्वास घट जाएगा।

एटीएम में पैसे डालने वाली कंपनी सिक्युरीट्रांस के एक कर्मचारी का कहना था कि बैंक अभी एक तारीख से दस तारीख के बीच पड़ने वाली तनख्वाह की तैयारी कर रहे हैं। अभी दिल्ली के बाहरी इलाकों के एटीएम में सामान्य तौर पर पांच से सात लाख रुपए पड़े हैं। उनका कहना था कि अभी इस हफ्ते के दौरान एटीएम में पैसे डालने के लिए बहुत पैसे भी नहीं आ रहे हैं। उनका कहना था कि बाहरी दिल्ली के पीएनबी, एसबीआइ, यूबीआइ, केनरा के एटीएम मशीनों में दस से बारह लाख और भीड़भाड़ वाले इलाकों में बीस लाख रुपए डाले जाते थे, जो समय घटकर आधे से भी कम हो गया है। उनका कहना था कि बैंकों का ध्यान एक से दस के बीच पैसे की मांग पर है।

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