डीटीसी के तुगलकी फैसले से परेशान हैं लोग

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के मुख्य महाप्रबंधक (परिचालन) ने विगत दो-तीन महीने पूर्व एक आदेश जारी किया है।

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के मुख्य महाप्रबंधक (परिचालन) ने विगत दो-तीन महीने पूर्व एक आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि शनिवार, रविवार और राजपत्रित छुट्टियों के दिनों में 30 फीसद कम बसें सड़कों पर चलाई जाएंगी। डीटीसी के इस तुगलकी फरमान का खामियाजा सबसे अधिक उत्तर-पश्चिम दिल्ली के ग्रामीणों, अधिकृत अनाधिकृत कालोनियों, पुनर्वास कालोनियों के लाखों दैनिक यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में न तो कलस्टर बसे हैं न ही मेट्रो। और शहरी क्षेत्र के मुकाबले बहुत कम आय वाले लोग निवास करते हैं जो केवल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर निर्भर हैं। शहरी क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में डीटीसी बसें, कलस्टर बसें, मेट्रो व अपने संसाधन हैं। ग्रामीण क्षेत्र से जो दैनिक यात्री सफर करते हैं उनमें से 98 फीसद का शनिवार को अवकाश नहीं होता है और अधिकांश लोग तो ऐसे हैं जिनका साप्ताहिक अवकाश रविवार को नहीं होता। मेरा डीटीसी के एमडी और दिल्ली के परिवहन मंत्री से आग्रह है कि वे इस समस्या पर विचार करें। और इसका समाधान कराएं। अन्यथा हमें मजबूर होकर चक्का जाम करने का रास्ता अपनाना पड़ेगा। विजेंद्र सिंह डबास, महासचिव, ग्रामीण परिवहन विकास मंच, उत्तर-पश्चिम दिल्ली।

दुर्घटनाओं के कारण
सड़कों पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिनमें लोगों की मौत हो जाती है। वैसे तो दुर्घटनाओं के बहुत से कारण होते हैं पर रात में वाहनों का बिना लाइटों के चलना एक बहुत बड़ा कारण है। बिना लाइटों के चलने में ई-रिक्शा सबसे आगे हैं। बैटरी कम खर्च हो इस चक्कर में वे रात को लाइट जलाते ही नहीं हैं। इससे कभी भी घातक दुर्घटना होना तय है। कुछ ऐसा ही ग्रामीण सेवा के वाहन भी करते हैं। ऐसे वाहनों का न केवल चालान हो बल्कि उनको जब्त भी किया जाना चाहिए।
इंद्र सिंह धिगान, 3 रेडियो कालोनी, किंग्जवे कैंप, दिल्ली।

रेलवे अधिकारी ध्यान दें
दिल्ली जंक्शन से चलने वाली दिल्ली-अंबाला इंटरसिटी एक्सप्रेस जो एक बजकर दस मिनट पर रवाना न हो एक बजकर 56 मिनट पर चली यानी शुरुआती स्टेशन से ही पौना घंटा लेट। मुझे 21 नवंबर को मेरठ जाना था। स्टेशन पर मैं ही नहीं बल्कि सैकड़ों यात्री रेलवे अधिकारियों को कोसते हुए आपस में चर्चा कर रहे थे कि यह ट्रेन रोज ही दिल्ली जंक्शन से देरी से चलती है। जिसकी वजह हम लोगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है। रेलकर्मियों के रवैए से लगता है कि वे जानबूझ कर हम लोगों को परेशान कर रहे हैं। क्योंकि इस रूट पर दस मिनट के अंतराल पर दो ट्रेने चला रखी है। पहली ट्रेन दिल्ली से वाया गाजियाबाद, मेरठ होते हुए सहारनपुर तक जाती है जिसका छूटने का समय 1.20 दोपहर का है और इस ट्रेन का समय दिल्ली से 1.10 का है। अगर यह गाड़ी समय से चलती है तो सारे यात्री जिनके पास पैसेंजर का टिकट होता है, शाहदरा और गाजियाबाद से इसमें चढ़ जाते हैं और टिकट चेकरों की चांदी ही चांदी हो जाती है। वो यात्रियों को एक्सप्रेस ट्रेन का हवाला देकर यात्रियों को खुलेआम लूटते हैं। रेलमंत्री से अनुरोध है कि इस पैसेंजर ट्रेन का समय 1.30 बजे कर दिया जाए और एक्सप्रेस ट्रेन को इसके बाद 2.30 बजे पर छोड़ा जाए तो इससे यात्रियों काफी सहूलियत होगी।
उमेश अग्रवाल, 405, बड़ा ठाकुर द्वारा, शाहदरा, दिल्ली।

शिकायत पुस्तिका कहां है?
रेल मंत्रालय हरेक स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए सुझाव और परिवाद पुस्तिका उपलब्ध कराती है ताकि यात्री को कोई सुझाव व शिकायत करनी हो तो उसमें दर्ज करा सके। साथ ही साथ स्थान भी लिखा होता है कि सुझाव/परिवाद की किताब और यहां पर उपलब्ध है। लेकिन शाहदरा जंक्शन पर यात्रियों को जानबूझ कर गुमराह किया जाता है। पूछताछ करके बाहर लिखा गया है कि शिकायत की किताब हेड टीसी रूम में रखी गई है, वहीं दूसरे बोर्ड पर लिखा गया है कि किताब पूछताछ घर पर उपलब्ध है। ऐसा क्यों? संबंधित अधिकारी बताएं।

एमबी दुबे, मोहन पार्क, नवीन शाहदरा, दिल्ली।
वारंटी में होने पर भी ठीक नहीं हुआ गीजर
मेरे पास अराइज (अराइज इंडिया लिमिटेड) का एक गीजर एजी चैंपियन 25 लीटर है। इसे 26 दिसंबर 2014 को खरीदा गया था। तुरंत ही इससे पानी टपकने लगा। उपभोक्ता शिकायत के नंबरों पर भिन्न कारणों से बात नहीं हो पाई और शिकायत दर्ज नहीं करा पाया। इस महीने के शुरू में जब गीजर की जरूरत महसूस हुई तो शिकायत दर्ज कराने में वही समस्या आई और आखिरकार 11 नवंबर को शिकायत दर्ज करा पाया। मेकैनिक ने रसीद होने के बावजूद वारंटी कार्ड मांगा और कहकर चला गया कि इसका टैंक फट गया है। बाद में बदल दूंगा। लेकिन वह कई दिनों तक वापस नहीं आया। फोन करने पर पता चला कि गारंटी कार्ड नहीं होने के कारण मेरी शिकायत वारंटी में कवर नहीं होगी और कंपनी की ओर से मामला बंद हो गया है। मैंने वारंटी कार्ड ढूंढ़कर फिर शिकायत दर्ज कराई और उसके बाद मेकैनिक गारंटी कार्ड की तस्वीर उतारकर ले गया और कहा कि एक-दो दिन में वह गीजर ठीक कर जाएगा। लेकिन मेरा गीजर अभी तक ठीक नहीं हुआ है।
संजय कुमार सिंह, वैशाली, गाजियाबाद

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