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सिर्फ 70 मिनट में पहुंच जाएंगे दिल्ली से मुंबई, प्‍लेन से सस्‍ती है 1080 Kmph की स्‍पीड से चलने वाली ये सवारी!

प्रस्तावित मार्गों और भारत में उनकी व्यवहार्यता के बीच हाइपरलूप वन पांच कॉरीडोर पर विचार कर रही है, जहां सिस्टम बनाया जाएगा। इनमें दिल्ली-मुंबई, बैंग्लोर-तिरुअंतपुरम, चेन्नई-बैंग्लोर और एक पोर्ट कनेक्टर प्रोजेक्ट शामिल है।

Author नई दिल्ली। | January 25, 2017 6:42 PM
इस टेक्नोलॉजी के तहत एक पोड को ट्यूब के अंदर 1,080 किलोमीटर प्रति घंटे के रफ्तार से चलाया जाता है। (Photo Source: Videograb/Hyperloop)

दिल्ली से मुंबई तक की यात्रा के लिए 70 मिनट या मुंबई से चेन्नई तक के ट्रैवल के लिए 60 मिनट। चुनाव आपको करना है। यह समय हाइपरलूप है जो आपको एक शहर से दूसरे शहर में एयरलाइन से भी कम और सस्ते में पहुंचा सकता है। यह बात दिल्ली में मौजूद लॉस एंजेल्स बेस्ट स्टार्टअप कंपनी के सीनियसर एक्जीक्यूटिव्स ने मंगलवार को कहा। साल 2013 में टेस्ला मोटर्स के सीआईओ और सहसंस्थापक एलोन मस्क ने इसका प्रस्ताव रखा था। हाइपरलूप हाई स्पीड ट्रेन का विकल्प है जो कि माल या पैसेंजर्स को प्वाइट A से प्वाइंट B अर्थात् एक जगह से दूसरी जगह तक पोड्स में कम दबाव वाले स्टील ट्यूब के जरिए ले जाया जाता है। हालांकि भारत में हाइपरलूप के लिए स्टील ट्यूब सेटअप करने में काफी समय लगेगा। स्टार्ट अप की टॉप लेवल टीम प्रोजेक्ट के अच्छे लोग और फंड जुटाने के लिए भारत आई है। दिल्ली से मुंबई की दूरी ट्रेन से करीब 1400 किलोमीटर है।

हाइपरलूप के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट निक इरले ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि हम फंट जुटाने की अपनी प्रकिया में है और इसके लिए हम भारतीय निवेशकों से भी बात कर रहे हैं। हमने भारत में सरकारी संस्थाओं से भी मीटिंग की योजना बनाई है और इस तकनीक को चलाने के लिए नियम कायदे बनाने में सभी संभव मदद करेंगे। डीपी वर्ल्ड, शेरपा कैपिटल और जीई वेंचर्स के समर्थन वाली कंपनी हाइपरलूपवन का दावा है कि दुनिया में सिर्फ उसी के पास ऑपरेशनल प्रोटोटाइप है और मार्च महीने में अमेरिका के नेवादा में इसका परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में सात प्रोजेक्ट के लिए साइन किए गए हैं जिनमें अबु धाबी और दुबई को जोड़ना भी शामिल है। पहला कॉमर्शियल प्रोजेक्ट 2020 तक पूरा होगा।

प्रस्तावित मार्गों और भारत में उनकी व्यवहार्यता के बीच हाइपरलूप वन पांच कॉरीडोर पर विचार कर रही है, जहां सिस्टम बनाया जाएगा। इनमें दिल्ली-मुंबई, बैंग्लोर-तिरुअंतपुरम, चेन्नई-बैंग्लोर और एक पोर्ट कनेक्टर प्रोजेक्ट शामिल है। इस टेक्नोलॉजी के तहत एक पोड को ट्यूब के अंदर 1,080 किलोमीटर प्रति घंटे के रफ्तार से चलाया जाता है और इसमें 24 लक्जरी सीटें या 50 बिजनेस क्लास या 80-90 इकोनॉमी क्लास की सीटें होती हैं। हर 10 सेकेंड के अंतराल में चलने वाले पॉड्स एक घंटे में 20 हजार यात्रियों को सभी दिशा में ले जा सकता है। वहीं एक पॉड करीब 70 टन माल को ले जा सकता है।

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