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बिजनेस में अनिल अंबानी का फोकस बदला, अब रक्षा क्षेत्र में सबसे ज्‍यादा कारोबार करेगा रिलायंस ग्रुप

भारत फिलहाल रक्षा क्षेत्र में जरूरत का 70 प्रतिशत सामान बाहर से आयात करता है।

अनिल अंबानी ने शेयर धारकों की बैठक में ये सूचना दी।(फाइल फोटो)

अनिल धीरूभाई अंबानी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन अनिल अंबानी ने कहा कि उनके ग्रुप के लिए आने वाले कुछ वर्षों में डिफेंस सबसे बड़ा व्यापार होगा। उनका कहना है कि इसमें वह 1 लाख करोड़ रुपये सालाना के अवसर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि समूह का फोकस नेवी, एयरफोर्स और आर्मी के लिए अडवांस हथियार उत्पादक और सप्लायर बनने पर है । इसके साथ कंपनी दुनिया भर में अपनी छाप छोड़ेगी। करीब 80 एनालिस्ट्स के आगे बोलते हुए अनिल अंबानी ने 27 फरवरी को एक मीटिंग में भविष्य में रक्षा क्षेत्र को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर के लिए इस क्षेत्र में काफी अवसर हैं, क्योंकि भारत फिलहाल अपनी जरूरत का 70 प्रतिशत सामान बाहर से आयात करता है।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में रिलायंस ग्रुप की एंट्री का कारण सरकार का मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट और स्किल इंडिया पॉलिसी है, जो इस क्षेत्र में काफी अवसर मुहैया कराएगी। बैठक की प्रेजेंटेशन के मुताबिक उन्होंने कहा, इस क्षेत्र में नेवी, आर्मी और एयरफोर्स और आंतरिक सुरक्षा के लिए अगले 15 वर्षों में 15 लाख करोड़ के अवसर हैं। यह पहली बार है जब अंबानी और उनके समूह ने डिफेंस बिजनेस के लिए कोई बैठक बुलाई हो। अनिल अंबानी ने बताया कि फिलहाल रिलायंस डिफेंस में 2000 कर्मचारी हैं, जिसमें 200 लोगों की मैनेजमेंट टीम शामिल है।

आपको बता दें कि 30 जनवरी को रिलायंस डिफेंस एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड और रक्षा मंत्रालय बीच 916 करोड़ रुपए का एक समझौता हुआ था। इसके तहत रिलायंस भारतीय तटरक्षक के लिए 14 त्वरित पेट्रोल नौकाओं का डिजाइनिंग और निर्माण करेगी। रिलायंस डिफेंस को यह ठेका एक प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया के बाद मिला था। इसमें सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्र की लगभग सभी कंपनियों ने हिस्सेदारी की थी जिनमें एलएंडटी, कोचीन शिपयार्ड, गोवा शिपयार्ड, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड शामिल थीं। यह पहली दफा था कि जब किसी निजी क्षेत्र की जहाज बनाने वाली कंपनी को इस तरह का ठेका मिला था।

इसके बाद 14 फरवरी को रिलायंस डिफेंस ने अमेरिकी नौसेना के साथ उसके युद्ध पोतों की मरम्मत करने का समझौता किया था। नए समझौते के तहत कंपनी अमेरिका के सातवें बेड़े के पोतों की मरम्मत का काम करेगी। अमेरिकी नौसेना के इस बेड़े के पास पश्चिमी प्रशांत और हिंद महासागर की जिम्मेदारी है। वहीं माना जा रहा है कि इस समझौते से रिलायंस को काफी फायदा होगा। अमेरिकी नौसेना के इस बेड़े से लगभग 50-70 पोत या पनडुब्बियां पश्चिमी प्रशांत और हिंद महासागर में ऐक्टिव रहती हैं। इसके अलावा क्षेत्र में 140 विमानों और लगभग 20,000 नौसैनिकों की मौजूदगी भी होती है।

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