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ग्रेटर नोएडा के डिफॉल्टर बिल्डर्स में शामिल कई टॉप बिल्डर्स, मुश्किल में फ्लैट खरीददार

ग्रेटर नोएडा में फ्लैट्स बना रहे करीब 95 बिल्डर्स को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने डिफॉल्टर्स की लिस्ट में डाल दिया है।

Author September 10, 2016 4:26 PM
बिल्डर्स को डिफॉल्टर्स की लिस्ट में डालने से इनके प्रोजक्ट में घर खरीदने वाले लोग मुसीबत में फंसे गए हैं।

ग्रेटर नोएडा में फ्लैट्स बना रहे करीब 95 बिल्डर्स को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने डिफॉल्टर्स की लिस्ट में डाल दिया है और उन पर अथॉरिटी के 3520 करोड़ रुपये बकाया हैं, जिसमें आम्रपाली, यूनिटेक और एटीएस बिल्डर्स का नाम भी शामिल है। इन बिल्डर्स को डिफॉल्टर्स की लिस्ट में डालने से इनके प्रोजक्ट में घर खरीदने वाले लोग मुसीबत में फंसे गए हैं। वहीं ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर www.greaternoida.com पर इन सभी डिफॉल्टर्स की लिस्ट भी डाली है। साथ ही प्राधिकरण ने इन बिल्डर्स को पैसे जमा कराने या कार्रवाई का सामना करने के लिए नोटिस जारी करने का फैसला किया है। अथॉरिटी ने कहा है कि बिल्डर्स 30 सितंबर से पहले 25 फीसदी बकाए का भुगतान करें। हालांकि जीएनआईडीए की आवासीय स्कीम में 1376 डिफाल्टर्स ऐसे हैं जिनपर 369 करोड़ का कर्ज है लेकिन वो इस स्कीम का फायदा नहीं उठा रहे और उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा।

अगर लैंड डिफॉल्टर्स ऐसा करने में नाकाम होते हैं तो उन्हें ब्याज का भुगतान करना होगा और पैसे न भरने पर उनका जमीन आवंटन रद्द कर दिए जायेंगे। जीएनआईडीए सीईओ दीपक अग्रवाल का कहना है कि पहले 25 फीसदी बकाया चुकाना होगा और बाकी के 75 फीसदी पैसे 12 फीसदी ब्याज के साथ  किस्तों में वसूला जाएगा। उन्होंने ये भी कहा कि डिफॉल्टर्स के लिए यह पैसे देने का अच्छा मौका है। उसके बाद हम कार्रवाई करेंगे और उनके पट्टे केंसिल कर देंगे। उन्होंने बताया कि हमने बिल्डर्स के साथ बैठक की है जिसमें से अधिकतर बिल्डर बकाया चुकाने के लिए तैयार है।

गौरतलब है कि डिफॉल्टर बिल्डर में कई नामी बिल्डरों का भी नाम शामिल है। जिसमें आम्रपाली 879 करोड़ रुपये, यूनिटेक पर 773 करोड़ रुपये, सुपरटेक  पर 282 करोड़ रुपये, पार्श्वीनाथ पर 163 करोड़ रुपये, एल्डि्को इंफ्रा पर 159 करोड़ रुपये और ओमेक्सव पर 103 करोड़ रुपये बकाया है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डरों शिकंजा कसते हुए यूनिटेक को कड़ी फटकार  लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक को तुरंत पैसे लौटाने का आदेश था। वहीं सुपरटेक के लिए सुप्रीम कोर्ट के बेहद कड़े शब्द को प्रयोग करते हुए कहा है कि बिल्डर मरे या डूबे इससे कोई मतलब नहीं होना चाहिए।

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