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डेबिट और क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन पेमेंट का आज आखिरी दिन, नहीं किया तो खत्म हो जाएगी सुविधा

Debit and Credit card transactions: यदि आप आज भी ऑनलाइन या इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन नहीं करते हैं तो फिर यह सुविधा आपके कार्ड पर डीएक्टिवेट हो जाएगी।

debit credit cardप्रतीकात्मक तस्वीर

Debit and Credit card transactions: यदि आपने अब तक अपने क्रेडिट या फिर डेबिट कार्ड के जरिए कोई ऑनलाइन या फिर इंटरनेशनल पेमेंट नहीं किया है तो फिर आज के बाद यह सुविधा समाप्त हो जाएगी। यदि आप चाहते हैं कि आप कार्ड पर यह सुविधा बनी रहे तो ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की मियाद का आज आखिरी दिन है। यदि आप आज भी ऑनलाइन या इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन नहीं करते हैं तो फिर यह सुविधा आपके कार्ड पर डीएक्टिवेट हो जाएगी। हालांकि आपके पास बैंक को मेसेज भेजकर या फिर मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए यह सुविधा चालू कराने का विकल्प होगा।

बता दें कि इस साल की शुरुआत में आरबीआई ने बैंकों को आदेश दिया था कि वे डेबिट और क्रेडिट कार्ड देते वक्त सिर्फ इंडियन स्टोर्स पर पेमेंट का ही फीचर दें। यदि ग्राहक की ओर से इंटरनेशनल पेमेंट और ऑनलाइन पेमेंट के फीचर की मांग की जाती है, तभी यह सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। यही नहीं केंद्रीय बैंक ने बैंकों को आदेश दिया था कि 16 मार्च से वे ऐसे सभी कार्डों पर ऑनलाइन और इंटरनेशनल पेमेंट पर रोक लगाएं, जिनका इनके लिए इस्तेमाल न हुआ हो।

SBI समेत कई बैंकों ने ग्राहकों को भेजे मेसेज: आरबीआई का मानना है कि ऐसे यूजर जो कभी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन नहीं करते हैं, उनके कार्ड पर भी यह सुविधा होना फ्रॉड की आशंका को बढ़ाता है। भारतीय स्टेट बैंक समेत कई बैंकों की ओर से ग्राहकों को इस संबंध में मेसेज भी भेजे गए हैं। बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को ऐसा फीचर लॉन्च करने का भी आदेश दिया है, जिसके जरिए ग्राहक अपने कार्ड को स्विच ऑन और स्विच ऑफ कर सकें। यही नहीं कार्ड पर ट्रांजेक्शन की लिमिट तय करने की भी सुविधा देने का आदेश दिया है। इसके जरिए ग्राहक एक दिन में खर्च की सीमा या किसी एक ट्रांजेक्शन में खर्च की लिमिट तय कर सकेंगे।

देश में हैं कुल 85 करोड़ लोग हैं डेबिट/क्रेडिट कार्ड धारक: बता दें कि देश में कुल 5 करोड़ के करीब क्रेडिट कार्ड यूजर हैं, जबकि 80 करोड़ से ज्यादा डेबिट कार्ड धारक हैं। बीते कई सालों में डेबिट और क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। धोखाधड़ी के ऐसे मामलों में आमतौर पर ऐसे लोग शिकार हुए हैं, जो तकनीक फ्रेंडली नहीं हैं। ऐसे में आरबीआई ने ऐसे लोगों को बचाने के लिए ही यह आदेश दिया है।

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