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विदेश में खुशबू बिखेर चुका काला नमक चावल के अस्तित्व पर खतरा

परंपरागत काला नमक की लंबी प्रजाति की जगह इसकी बहुत सी प्रजातियां विकसित तो कर ली गई हैं, पर इसके सुगंध और स्वाद को संरक्षित करने में कामयाबी नहीं मिल सकी।

काला नमक।(प्रतीकात्मक तस्वीर)

यूरोप समेत तमाम देशों तक अपनी खुशबू बिखेर चुका बस्ती संभाग के सिद्धार्थनगर जिले में पैदा होने वाला काला नमक चावल पैदावार और महक खत्म होने से अब अपने पहचान के संकट से जूझ रहा है। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यहां बताया कि जलवायु संकट और कम बारिश से पिछले दो दशकों से काला नमक चावल की पैदावार और महक प्रभावित होने से किसानों का काला नमक की खेती से मोह भंग हो गया है। पहले 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती होती थी जो अब घटकर 2000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही रह गई है। सूत्रों के मुताबिक अद्वितीय महक, सुपाच्य और उच्च पोषक गुणों की वजह से 600 ईसा पूर्व से ही यहां पैदा होने वाला काला नमक चावल शुरुआत में भगवान बुद्ध के प्रसाद के तौर पर मशहूर था, पर बाद में अभिजात वर्ग में इसने अपनी पैठ बना ली। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान अंग्रेज यहां के काला नमक चावल की खुशबू के इस कदर दीवाने हो गए थे कि उन्होंने इस इलाके में काला नमक चावल के खेतों की सिंचाई के लिए 10 कृत्रिम सागरों और 243 किलोमीटर लंबी नहरों का निर्माण करा डाला।

इसके बाद यहां पैदा होने वाला काला नमक चावल खाड़ी देशों से लेकर यूरोप तक भेजा जाने लगा। देश को आजादी मिलने के बाद कालांतर में यहां बनाए गए सागर और नहरें सिल्ट से पट जाने से काला नमक चावल की खुशबू और पैदावार धीरे-धीरे खत्म होने से यह अपनी पहचान खोता चला गया। अब तक काला नमक की खेती को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं। परंपरागत काला नमक की लंबी प्रजाति की जगह इसकी बहुत सी प्रजातियां विकसित तो कर ली गई हैं, पर इसके सुगंध और स्वाद को संरक्षित करने में कामयाबी नहीं मिल सकी। परंपरागत लंबी प्रजाति की महक भी खत्म हो जाने से अब काला नमक के अस्तित्व को ही खतरा नजर आ रहा है। सूत्रों ने बताया कि 2013-14 में यूपी दास ने एक स्वयंसेवी संगठन की मदद से काला नमक चावल का पेटेंट तो करा लिया। लेकिन इसके संरक्षण और संवर्धन का प्रयास नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि 2014-15 और 2015-2016 में कृषि विभाग ने काला नमक के संरक्षण, संवर्धन, भंडारण और वितरण की कार्य योजना प्रदेश सरकार को सौंपी थी जो फाइलों में गुम हो गई।

प्रदेश के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट प्लान के तहत काला नमक चावल को चयनित किए जाने के बाद इसके उत्पादन को बढ़ावा देने की उम्मीद जगी है। काला नमक के खेती वाले इलाकों में बने सागरों और जमीनदारी नहर प्रणाली के पुनरुद्धार की योजना शासन को भेजी जा चुकी है। काला नमक की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग इसके सुगंध को भी संरक्षित करने की दिशा में काम कर रहा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट प्लान के तहत अब कृषि विभाग काला नमक की खेती को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं तैयार कर रहा है जिसे प्रदेश सरकार की मंजूरी मिलते ही लागू किया जाएगा।

लक्ष्मी नारायण पांडेय

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