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रतन टाटा पर बरसे मिस्त्री, लगाई आरोपों की झड़ी

निर्णय प्रक्रिया में बदलाव से टाटा समूह में कई वैकल्पिक शक्ति केंद्र बन गए थे।
Author मुंबई | October 27, 2016 03:25 am
रतन टाटा के 75 वर्ष की आयु पूरे करने पर 29 दिसंबर 2012 में उनकी सेवानिवृत्ति के बाद मिस्त्री को उनके उत्तराधिकारी के तौर पर चुना गया था।

टाटा समूह के चेयरमैन पद से हटाए जाने से आहत साइरस मिस्त्री बुधवार को रतन टाटा पर बरसे। मिस्त्री ने कहा कंपनी में उन्हें ‘एक निरीह चेयरमैन’ बना कर रख दिया गया था। उन्होंने कहा कि निर्णय प्रक्रिया में बदलाव से टाटा समूह में कई वैकल्पिक शक्ति केंद्र बन गए थे।  टाटा संस के निदेशक मंडल के सदस्यों को लिखे एक गोपनीय किंतु विस्फोटक ईमेल में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने का कोई मौका दिए बिना ही भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूह के चेयरमैन पद से हटाया गया। मिस्त्री का कहना है कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई ‘चटपट अंदाज’ में की गई। उन्होंने इसे कारपोरेट बाकी
जगत के इतिहास की अनूठी घटना बताया।

मिस्त्री ने 25 अक्तूबर को लिखे ई-मेल में कहा-‘24 अक्तूबर 2016 को निदेशक मंडल की बैठक में जो कुछ हुआ, वह हतप्रभ करने वाला था और उससे मैं अवाक रह गया। वहां की कार्यवाही के अवैध और कानून के विपरीत होने के बारे में बताने के अलावा, मुझे यह कहना है कि इससे निदेशक मंडल की प्रतिष्ठा में कोई वृद्धि नहीं हुई।’मीडिया को बुधवार को जारी इस ई-मेल में उन्होंने लिखा है-‘अपने चेयरमैन को बिना स्पष्टीकरण और स्वयं के बचाव के लिए कोई मौका दिए बिना इस तरह से हटाना कारपोरेट इतिहास में अनूठा मामला है।’ मिस्त्री के आरोपों के बारे में टाटा संस से जवाब लेने की कोशिश की गई। लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

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टाटा समूह के पूर्व प्रमुख ने कहा कि उन्हें दिसंबर 2012 में जब नियुक्त किया गया था, उन्हें काम करने में आजादी देने का वादा किया गया था, लेकिन कंपनी के संविधान में संशोधन व टाटा परिवार ट्रस्ट और टाटा संस के निदेशक मंडल के बीच संवाद संपर्क के नियम बदल दिए गए थे।  साइरस मिस्त्री ने कहा कि उन्हें समस्याएं विरासत में मिलीं। उन्होंने कहा है कि निदेशक मंडल में टाटा पारिवार के ट्रस्टों के प्रतिनिधि ‘केवल डाकिये’ बन कर रह गए थे। वे बैठकों को बीच में छोड़ कर ‘श्रीमान टाटा’ से निर्देश लेने चले जाते थे।टाटा और अपने बीच बेहतर संबंध नहीं होने का स्पष्ट संकेत देते हुए उन्होंने अपने ईमेल में रतन टाटा द्वारा शुरू की गई घाटे वाली नैनो कार परियोजना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इसे भावनात्मक कारणों से बंद नहीं किया जा सका। एक कारण यह भी था कि इसे बंद करने से बिजली की कार बनाने वाली एक इकाई को ‘सूक्ष्म ग्लाइडर’ की आपूर्ति बंद हो जाती। उस इकाई में टाटा की हिस्सेदारी है।
मिस्त्री ने आरोप लगाया है कि यह रतन टाटा ही थे जिन्होंने समूह को विमानन क्षेत्र में कदम रखने को मजबूर किया था और ऐसे में मेरे लिए एयर एशिया व सिंगापुर एयरलाइंस के साथ हाथ मिलाना एक औपचारिकता मात्र बची थी। मिस्त्री ने कहा कि समूह को विमानन क्षेत्र में उतरने के लिए पहले की योजनाओं से कही अधिक पूंजी डालनी पड़ी।

मिस्त्री ने कुछ सौदों को लेकर नैतिक रूप से चिंता जताई थी और हाल में फोरेंसिक जांच से 22 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी वाले सौदों का खुलासा हुआ। इसमें भारत और सिंगापुर में ऐसे पक्ष जुड़े थे जो वास्तव में हैं ही नहीं। उन्होंने आगाह किया है कि समूह की घाटे वाली जिन पांच कंपनियों की पहचान की है उनकी वजह से नमक से लेकर साफ्टवेयर बनाने वाले टाटा समूह की संपत्तियों पर 1.18 लाख करोड़ रुपए का बट्टा लग सकता है। अपने रिकार्ड का बचाव करते हुए मिस्त्री ने कहा कि उन्हें कर्ज में डूबा उपक्रम मिला, जिसे नुकसान हो रहा था। इनमें इंडियन होटल कंपनी, यात्री वाहन बनाने वाली टाटा मोटर्स, टाटा स्टील के यूरोपीय परिचालन व समूह की बिजली इकाई व उसकी दूरसंचार कंपनी हैं। साइरस मिस्त्री ने कहा कि अचानक से हुई से टाटा समूह की साख को काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा-‘मैं यह विश्वास नहीं कर सकता कि मुझे काम नहीं करने के आधार पर हटाया गया।’ उन्होंने दो निदेशकों का जिक्र किया जिन्होंने उन्हें हटाए जाने के पक्ष में वोट दिया जबकि हाल ही में उन लोगों ने उनके कामकाज की सराहना की थी।

मिस्त्री ने कहा कि यूरोपीय इस्पात कारोबार की संपत्ति का मूल्य 10 अरब डालर से ज्यादा घटने की आशंका है। आइएचसीएल की कई विदेशी संपत्तियां व ओरिएंट होटल्स में होल्डिंग को घाटे में बेचा गया। न्यूयार्क में पिएरे की लीज के लिए जो कठिन शर्तें रखी गईं, उनसे बाहर निकलना चुनौतीपूर्ण होगा।’ मिस्त्री ने कहा कि टाटा केमिकल्स को अपने ब्रिटेन तथा केन्या परिचालनों के संदर्भ में अभी भी कड़े फैसले करने की जरूरत है।

 

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