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वॉल-मार्ट के सीनियर ऑफीसर भ्रष्टाचार को लेकर सीवीसी की जांच के घेरे में

अमेरिका की सबसे बड़ी रिटेलर वॉल-मार्ट के शीर्ष कार्यकारी कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग(सीवीसी) की जांच के घेरे में हैं।

नई दिल्ली | November 26, 2015 2:11 AM
वैश्विक रिटेल कंपनी वॉलमार्ट। (फाइल फोटो)

अमेरिका की सबसे बड़ी रिटेलर वॉल-मार्ट के शीर्ष कार्यकारी कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग(सीवीसी) की जांच के घेरे में हैं। आरोप है कि कंपनी ने सीमा शुल्क से माल निकलवाने और भारत में स्टोर स्थापित करने के परमिट हासिल करने के लिए सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी थी।

कंपनी के अधिकारियों ने पिछले सात साल का बही खाता सौंपा है। इसे अलावा उन्हें सीवीसी को और दस्तावेज सौंपने के लिए कुछ और समय मांगा है। सतर्कता आयुक्त टीएम भसीन ने कहा- हमने वॉल-मार्ट के अधिकारियों को तलब किया है। इसके बाद कंपनी के भारत में प्रमुख सहित उनके दो वरिष्ठ कार्यकारियों से पूछताछ की गई है। उन्होंने संबंधित मामले में और दस्तावेज सौंपने के लिए 15 दिसंबर तक का समय मांगा है।

यह पहला मौका है जबकि सीवीसी ने किसी निजी कंपनी से संबंधित जांच शुरू की है। भसीन ने कहा कि दोनों अधिकारियों को सीवीसी कानून के संबंधित प्रावधान के तहत तलब किया गया था। इस प्रावधान के तहत सीवीसी को किसी भी व्यक्ति को देश के किसी भी हिस्से से बुलाने का अधिकार है। वॉल-मार्ट के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी जहां भी कारोबार करती है जिम्मेदारी और कानूनी तरीके से करती है।

अमेरिका और सभी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भ्रष्टाचार रोधक कानून का अनुपालन हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। यही वजह है कि हम समर्थन और प्रशिक्षण के लिए तीसरे पक्ष के अनुपालन विशेषज्ञों के साथ काम करते हैं। सतर्कता आयोग ने इस मामले में स्वयं संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उसे इस बात के प्रमाण मिले हैं कि वॉल-मार्ट स्टोर्स इंक ने कथित रूप से सीमा शुल्क से सामान निकलवाने और रीयल एस्टेट परमिट हासिल करने के लिए कथित रूप से भारतीय अधिकारियों को हजारों छोटे मूल्य की रिश्वत दी। इसमें से ज्यादातर भुगतान 200 डालर यानी 13,300 रुपए से भी कम है। वहीं कुछेक मामलों में तो मात्र पांच डालर या 330 रुपए तक की भी रिश्वत दी गई।

वॉल-मार्ट 2007 में भारती एंटरप्राइजेज के साथ सुपरमार्केट संयुक्त उद्यम के जरिए भारतीय बाजार में उतरी थी। 2013 में उसने भारती के साथ अपना गठजोड़ समाप्त कर दिया और भारत में खुदरा स्टोर खोलने की योजना छोड़ दी। कंपनी ने सिर्फ थोक कारोबारी के रूप में ही काम करने का फैसला किया है। भारत में जांच वॉल-मार्ट के मेक्सिको, चीन और ब्राजील के परिचालन की जांच का ही हिस्सा है। कंपनी पर अमेरिका के विदेशी भ्रष्ट व्यवहार कानून (एफसीपीए) के उल्लंघन का आरोप है। यह कानून विदेशी सरकारों के अधिकारियों को रिश्वत देने से रोकता है। वॉल-मार्ट की भारतीय इकाई को 2014 में 232 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। उसका राजस्व भी 32 फीसद घटकर 2,992.7 करोड़ रुपए रह गया।

 

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