SBI Research Report on Currency Circulation : एसबीआई रिसर्च की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक देश में करेंसी इन सर्कुलेशन (CiC) यानी लेन-देन में इस्तेमाल हो रहे नोटों की वैल्यू करीब 40 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। हैरानी की बात यह है कि ऐसा डिजिटल पेमेंट की बढ़ती लोकप्रियता के दौर में हो रहा है, जबकि UPI ट्रांजैक्शन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं और कैश-टू-GDP रेशियो में कमी आ रही है। सवाल यह है कि डिजिटल पेमेंट के इस दौर में बाजार में कैश की मात्रा और जरूरत क्यों बढ़ रही है? एसबीआई रिसर्च (SBI Research) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में इसके 4 बड़े कारण बताए हैं।

1. GST नोटिस से छोटे कारोबारियों के बर्ताव में बदलाव

SBI रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई 2025 में कर्नाटक में करीब 18,000 छोटे व्यापारियों को UPI लेनदेन के आधार पर GST के नोटिस मिले। जिसके बाद उनमें डिजिटल पेमेंट से कैश की तरफ जाने का रुझान बढ़ता नजर आया। रिपोर्ट में आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर बताया गया है कि जीएसटी नोटिस के मिलने के बाद कर्नाटक के उन जिलों में ATM से हर महीने औसतन 37 करोड़ रुपये ज्यादा निकाले जाने लगे, जहां पहले से ही नकदी ज्यादा निकाली जाती थी। इन जिलों में से बेंगलुरु को अलग कर दें, तो भी हर महीने करीब 10 करोड़ रुपये ज्यादा निकाले गए। 

रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक की इस खबर का “सिग्नल इफेक्ट” यानी असर दूसरे राज्यों में भी दिखा। मिसाल के तौर पर पश्चिम बंगाल और केरल में भी ऐसा ही ट्रेंड नजर आया है। मतलब साफ है – कुछ छोटे व्यापारी और ग्राहक UPI से हटकर फिर से कैश की ओर लौटे।

Also read : AI Impact Summit 2026: विदेशी मेहमानों को NPCI का तोहफा, बिना भारतीय नंबर कर सकेंगे UPI पेमेंट

2. ब्याज दरें घटने का असर

SBI रिसर्च की रिपोर्ट में मनी डिमांड मॉडल की मदद से यह बताया गया है कि कैश की डिमांड किन वजहों से बढ़ रही है। इसके मुताबिक जैसे-जैसे UPI का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कैश की मांग घटनी चाहिए, लेकिन ब्याज दरों में कमी और ग्रामीण इलाकों में कंजम्प्शन बढ़ने से नकदी की जरूरत बनी हुई है। 

ऐसा इसलिए क्योंकि कम ब्याज दरों के कारण लोग डिपॉजिट करने की बजाय खर्च करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। शहरी इलाकों में टैक्स कटौती से भी कंजम्प्शन बढ़ा है। यानी कंज्यूमर्स के लेवल पर पैसों का लेन-देन बढ़ने के कारण नकदी की जरूरत भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।

3. सोना-चांदी महंगे होने से बढ़ा कैश

रिपोर्ट के मुताबिक सोने, चांदी जैसे कीमती मेटल्स की कीमतों में तेज उछाल भी कैश बढ़ने का एक बड़ा कारण है। सोना और चांदी महंगे होने पर कई परिवारों ने अपनी पुरानी होल्डिंग बेचकर कैश निकाला है। इससे भी बाजार में कैश का फ्लो बढ़ा है। 

पहले लोग सोना खरीदने के लिए नकदी का ज्यादा इस्तेमाल करते रहे हैं। लेकिन इस बार तस्वीर उलटी है। लोग सोना-चांदी बेचकर कैश जुटा रहे हैं। इनकम टैक्स में राहत और कंजम्प्शन बढ़ने की वजह से भी यह कैश बाजार में सर्कुलेट हो रहा है।

Also read : क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए 1 अप्रैल से लागू सकते हैं नए नियम, इनकम टैक्स ड्राफ्ट रूल्स में क्या हैं प्रस्ताव

4. 2000 की जगह 100, 200 और 500 रुपये के नोट का बोलबाला

2000 रुपये के नोट बंद होने के बाद सिस्टम में 100, 200 और 500 रुपये के नोटों का हिस्सा बढ़ा है। SBI रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2025 तक मूल्य के हिसाब से 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 86% हो चुकी है। RBI ने भी बैंकों को निर्देश दिया है कि ATM में 100 और 200 रुपये के नोट ज्यादा उपलब्ध कराए जाएं।

दिलचस्प बात यह है कि UPI छोटे लेनदेन में ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक कुल UPI लेनदेन में 500 रुपये से कम के ट्रांजैक्शन का हिस्सा 86% है। यानी UPI अब तक मुख्य तौर पर छोटे नोटों को ही रिप्लेस कर पाया है, जिससे 500 रुपये के नोटों की जरूरत बनी हुई है। 

Also read : Income-tax Rules 2026 : नए इनकम टैक्स ड्राफ्ट रूल्स की 5 बड़ी बातें, आम लोगों पर क्या हो सकता है असर

इन आंकड़ों का क्या है मतलब

SBI रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक एक तरफ UPI की वजह से आर्थिक लेन-देन ज्यादा पारदर्शी बन रहे हैं, लेकिन कुछ सामाजिक और आर्थिक कारणों से कैश की जरूरत भी बनी हुई है। यही वजह है कि रिकॉर्ड UPI ट्रांजैक्शन के बावजूद देश में नकदी का सर्कुलेशन बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इन आंकड़ों का संदेश बिलकुल साफ है – डिजिटल पेमेंट को हतोत्साहित (disincentivize) करना ठीक नहीं है।