अमेरिका की एक ट्रेड कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका दिया है। बुधवार को कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह उन आयातकों को संभावित तौर पर रिफंड देना शुरू करे, जिन्होंने ऐसे टैरिफ का भुगतान किया था जिन्हें पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने गैर-कानूनी बताया था।

कोर्ट फाइलिंग के मुताबिक, मैनहट्टन में यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जज रिचर्ड ईटन ने सरकार को बिना टैरिफ असेस किए अमेरिका में लाखों शिपमेंट लाने की कॉस्ट फाइनल करने का आदेश दिया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने ब्याज के साथ रिफंड वापस करने को कहा है।

अमेरिका में जब कोई सामान आयात होता है, तो इंपोर्टर शुरुआत में अनुमानित शुल्क जमा करता है। लगभग 314 दिन बाद उस शुल्क को अंतिम रूप दिया जाता है, जिसे “लिक्विडेशन” कहा जाता है। जज ईटन ने कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) को निर्देश दिया कि वह उन शिपमेंट्स की एंट्री को बिना टैरिफ के अंतिम रूप दे, जिससे इंपोर्टर्स को रिफंड मिल सके।

सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि कस्टम्स विभाग के लिए ऐसा करना नया नहीं है। उनके मुताबिक, अगर इंपोर्टर किसी ड्यूटी का ज्यादा भुगतान कर देते हैं तो कस्टम्स रोजाना रिफंड जारी करता है, इसलिए सिस्टम को प्रोग्राम कर रिफंड देना संभव है।

उन्होंने कहा, “वे इसे हर दिन करते हैं। वे एंट्री को लिक्विडेट करते हैं और रिफंड करते हैं।”

शुक्रवार के लिए ईटन ने एक सुनवाई भी तय की जिसमें उन्होंने CBP के रिफंड प्लान पर अपडेट मांगे। उन्होंने अपने ऑर्डर में कहा कि कोर्ट के चीफ जज ने संकेत दिया कि ईटन ही एकमात्र जज हैं जो टैरिफ रिफंड मामलों की सुनवाई करेंगे।

कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन ने कोर्ट फाइलिंग में कहा है कि टैरिफ का आकलन किए बिना एंट्री कॉस्ट को फाइनल करने का काम “अभूतपूर्व” था और इसके लिए 70 मिलियन से ज्यादा एंट्री का मैन्युअल रिव्यू करने की जरूरत हो सकती है। एजेंसी ने दूसरी कोर्ट फाइलिंग में कहा था कि उसे रिफंड देने के अपने ऑप्शन देखने के लिए चार महीने तक का समय चाहिए।

CBP ने कमेंट के लिए रिक्वेस्ट का जवाब नहीं दिया।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, किंग एंड स्पैल्डिंग के पार्टनर और पूर्व सीनियर कॉमर्स अधिकारी रयान माजेरस ने कहा, “इस ऑर्डर की भाषा से यह साफ पता चलता है कि इंपोर्टर्स को IEEPA रिफंड पाने का हक है, बस एक ही रास्ता है।” “सरकार ऑर्डर के दायरे को चुनौती दे सकती है या कम से कम अमेरिकी कस्टम्स को यह काम करने के लिए और समय मांग सकती है, जो बेशक यहां एक बहुत बड़ा काम होगा।”

अमेरिकी सरकार ने अब बंद हो चुके टैरिफ से $130 बिलियन से ज्यादा इकट्ठा किए। सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड जारी करने के लिए कोई गाइडेंस नहीं दिया, जिससे यह कन्फ्यूजन पैदा हो गया कि इंपोर्टर्स को रिफंड कैसे मिलेगा।

ईटन का यह ऑर्डर एटमस फिल्ट्रेशन के लाए गए एक केस में आया, जिसने कोर्ट फाइलिंग में कहा कि उसने गैर-कानूनी टैरिफ के तौर पर करीब $11 मिलियन का पेमेंट किया है।

एटमस का केस उन करीब 2,000 केस में से एक है जो ट्रेड कोर्ट में IEEPA या इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगाए गए टैरिफ के रिफंड के लिए फाइल किए गए हैं।

इस फैसले का भारत पर असर?

भारत पर पहले 25% ‘लिबरेशन डे’ टैरिफ लगाया गया था। फिर रूसी तेल खरीद के वजह से 25% अतिरिक्त शुल्क यानी कुछ टैरिफ 50% पहुंच गया था। हालांकि, हाल ही में अमेरिका-भारत के बीच एक ट्रेड फ्रेमवर्क समझौते के तहत टैरिफ घटाकर 18% करने की बात कही गई। कोर्ट के निर्णय के बावजूद सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए।

कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिका में आने वाले सामान पर 15% की नई ग्लोबल लेवी (टैक्स) लगाएंगे।

कोर्ट के फैसले से टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किए जाने के बाद ट्रंप ने दावा किया कि ‘भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा और भारत को भुगतान करना ही होगा, जबकि अमेरिका को कुछ भी नहीं देना पड़ेगा।’

हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन कंपनियों से टैरिफ वसूला गया था, उन्हें रिफंड कैसे और कब मिलेगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड जारी करने के लिए कोई गाइडेंस नहीं दिया।

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