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हाई कोर्ट ने कच्चे तेल के निर्यात के अनुरोध वाली केयर्न इंडिया की याचिका को किया खारिज

केयर्न तथा केंद्र सरकार के बीच उत्पादन साझेदारी अनुबंध :पीएससी: के तहत कंपनी को कच्चे तेल की अपनी हिस्सेदारी के निर्यात की मंजूरी मांगने का अधिकार तभी होगा जब भारत आत्मनिर्भर हो जाए।
Author नई दिल्ली | October 18, 2016 14:20 pm
कच्चा तेल।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने ब्रिटेन के वेदांता समूह की कंपनी केयर्न इंडिया लि. की याचिका आज खारिज कर दी। याचिका में कंपनी ने अपने राजस्थान के बाड़मेर तेल फील्ड से अतिरिक्त कच्चा तेल के निर्यात की अनुमति देने का आग्रह किया था।  न्यायाधीश मनमोहन ने कहा कि केयर्न तथा केंद्र सरकार के बीच उत्पादन साझेदारी अनुबंध :पीएससी: के तहत कंपनी को कच्चे तेल की अपनी हिस्सेदारी के निर्यात की मंजूरी मांगने का अधिकार तभी होगा जब भारत आत्मनिर्भर हो जाए। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि केंद्र की तरफ से ऐसी कोई सूचना नहीं है कि भारत ने आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है। केयर्न पीएससी के अंतर्गत विवाद समाधान प्रणाली के तहत सरकार से मुआवजे की मांग कर सकती है।

अदालत ने 10 अगस्त को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कंपनी की दलील थी कि निर्यात नीति उसे निर्यात का अधिकार देती है।सुनवाई के दौरान पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तरफ से पेश अतिरिक्त सोलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने केयर्न इंडिया की अर्जी का विरोध किया और कहा कि उसे कच्चे तेल के निर्यात की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि बिना रिफाइन वाले पेट्रोलियम उत्पाद के निर्यात की अनुमति नहीं है।हालांकि कंपनी की तरफ से पेश अधिवक्ता ने कहा कि मंत्रालय ने अदालत के समक्ष ऐसी कोई नीति नहीं रखी जिससे पता चले कि कच्चे तेल का निर्यात नहीं किया जा सकता। सरकार ने कहा था कि देश के कच्चे तेल का निर्यात की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि यह राष्ट्र हित के लिहाज से नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि कुल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात किया जाता है।

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