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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा, 11.35 लाख फर्जी पैन कार्ड का आंकड़ा छोटा कैसे

शीर्ष अदालत ने कहा कि यह बात रिकॉर्ड में आ चुकी है कि 11.35 लाख फर्जी या नकली पैन नंबरों की पहचान की गई है और इनमें से 10.52 लाख मामले व्यक्तिगत करदाताओं से जुड़े हैं।

Author नई दिल्ली | June 12, 2017 01:33 am
पैन कार्ड (सांकेतिक तस्वीर)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि व्यक्तिगत करदाताओं के 10.52 लाख फर्जी पैन कार्डों के आंकड़े को देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिहाज से बेहद छोटा नहीं बताया जा सकता। यह आंकड़ा ऐसे कुल दस्तावेजों का 0.4 फीसद है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह बात रिकॉर्ड में आ चुकी है कि 11.35 लाख फर्जी या नकली पैन नंबरों की पहचान की गई है और इनमें से 10.52 लाख मामले व्यक्तिगत करदाताओं से जुड़े हैं। अदालत ने पैन कार्ड को जारी करने और टैक्स रिटर्न दाखिल करने में आधार को अनिवार्य बनाने की आयकर कानून की धारा 139एए को वैध ठहराते हुए 157 पन्नों के फैसले में ये बातें कहीं। हालांकि अदालत ने तब तक के लिए इसे लागू किए जाने पर आंशिक रोक लगा दी, जब तक उसकी संवैधानिक पीठ आधार से जुड़े निजता के अधिकार के वृहद मुद्दे पर गौर नहीं कर लेती।कानून की धारा 139एए आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए और पैन कार्ड के आबंटन की याचिका दायर करने के लिए आधार या उसके लिए किए गए आवेदन के पंजीकरण संबंधी जानकारी देने को अनिवार्य बनाती है। यह बात एक जुलाई से लागू होनी है। न्यायमूर्ति एके सीकरी की अध्यक्षता वाले पीठ ने कहा- याचियों ने यह दलील देने की कोशिश की कि फर्जी पैन कार्ड वाले लोग महज 0.4 फीसद हैं, इसलिए ऐसे किसी प्रावधान की जरूरत नहीं है।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण की सदस्यता वाले इस पीठ ने कहा- हम फीसद के आंकड़ों के हिसाब से नहीं चल सकते। इस तरह के मामलों की सटीक संख्या 10.52 लाख है। अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और देश पर बुरा प्रभाव डालने के लिहाज से इस संख्या को छोटा नहीं माना जा सकता। पीठ ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी की ओर से दायर अभ्यावेदनों में कही गई इस बात पर गौर किया कि फर्जी पैन कार्डों का इस्तेमाल फर्जी कंपनियों को धन पहुंचाने में इस्तेमाल किया जाता था। इस बात पर पीठ ने कहा- तथ्य यह है कि कंपनियां अंतत: कुछ लोगों की ओर से ही चलाई जाती हैं और इन लोगों को अपनी पहचान दिखने के लिए दस्तावेज पेश कर ने होते हैं। कर प्रणाली में आधार को लेकर आना कालेधन या काला धन सफेद करने पर रोक लगाने के उपायों में से एक है। इस योजना को सिर्फ इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि इस उद्देश्य की पूर्ण पूर्ति नहीं हो सकेगी।इसमें कहा गया- इस बुराई की जड़ें बहुत गहरी हैं और इससे निपटने के लिए कई कदम उठाने की जरूरत है। ये कदम एकसाथ उठाए जा सकते हैं। इन कदमों के मिलेजुले नतीजे आ सकते हैं और यह जरूरी नहीं कि अलग-थलग तौर पर उठाया गया प्रत्येक कदम काफी हो।

 

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