केंद्र सरकार आगामी जनगणना और परिसीमन (Delimitation) प्रक्रियाओं से महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को अलग करने की संभावना तलाश रही है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है।
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 किया जा सकता है। इसमें करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
अगर यह योजना लागू होती है तो लोकसभा की नई सीट व्यवस्था 2029 के लोकसभा चुनावों से प्रभावी हो सकती है। इसके लिए जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के जरिए सीटों का नया बंटवारा किया जाएगा।
सांसदों की संख्या में लगभग 50% की बढ़ोतरी
– मौजूदा समय में लोकसभा में की संख्या – 543
– नई योजना के अनुसार लोकसभा में की संख्या – 816
– जुड़ सकते हैं इतने नए सांसद – 273
यह लगभग 50% की वृद्धि होगी।
सांसद बढ़ाने की क्या है वजह?
इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
– महिला आरक्षण (33%) लागू करना
– 2026 के बाद होने वाला परिसीमन (Delimitation) जिसमें आबादी के हिसाब से सीटें बढ़ाई जाएंगी।
एक सांसद पर सरकार कितना खर्च करती है?
एक सांसद को लगभग ये सुविधाएं मिलती हैं-
– सैलरी: 1.24 लाख रुपये / महीना
– दैनिक भत्ता: 2,500 रुपये प्रति दिन (सत्र के दौरान)
– निर्वाचन क्षेत्र भत्ता: 70,000 रुपये / महीना
– ऑफिस भत्ता: 60,000 रुपये / महीना
इसके अलावा, सांसदों को मुफ्त घर, यात्रा, बिजली-पानी आदि सुविधाएं भी मिलती हैं।
अगर सभी भत्तों और सुविधाओं को जोड़ें तो एक सांसद पर वार्षिक लगभग 30 लाख रुपये से ज्यादा खर्च माना जाता है।
273 नए सांसद बढ़े तो कुल खर्च कितना बढ़ेगा?
मान लीजिए एक सांसद पर सालाना लगभग 30 लाख रुपये खर्च होते हैं।
273 × 30 लाख = सालाना 81.9 करोड़।
इसका मतलब अगर नए 273 नए सांसद बढ़े तो लगभग 81.9-85 करोड़ सालाना अतिरिक्त खर्च हो सकता है (अनुमान)।
