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कोरोनाः इधर महामारी के बीच मरते रहे गरीब, उधर दुनिया के 10 सबसे अमीर लोगों की संपत्ति हो गई दोगुनी- Oxfam

Oxfam की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी की वजह से दुनियाभर में 160 मिलियन से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने के लिए मजबूर हुए है। जिसमें बड़ी संख्या में महिला और गैर श्वेत नस्ल के लोग है।

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10 सबसे अमीर लोगों की संपत्ति 700 बिलियन डॉलर से बढ़कर 1.5 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गई।

कोरोना महामारी को दुनिया में आए दो साल हो गए हैं। इस समय विश्व के कई देश कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट की वजह से तीसरी और चौथी लहर का सामना कर रहे हैं। कोरोना महामारी की भयावहता को इसी बात से समझा जा सकता है कि, महामारी से पूरी दुनिया में रोजाना 21,300 लोगों की मौत हुई। जिसमें बहुत से लोगों को तो बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं तक हासिल नहीं हुई। लेकिन इस सब के बीच Oxfam की एक रिपोर्ट सामने आई है। जिससे पता चलता है कि, कोरोना महामारी के दोरान दुनिया के 10 सबसे अमीर लोगों की संपत्ति दोगुनी हो गई। जबकि इस दौरान दुनिया में कई ऐसे भी लोग थे जो रोजीरोटी के लिए सड़क पर संघर्ष कर रहे थे।

हर दिन औसतन 1.3 बिलियन डॉलर बढ़ी संपत्ति – Oxfam की रिपोर्ट के अनुसार बीते दो साल में 10 सबसे अमीर लोगों की संपत्ति 700 बिलियन डॉलर से बढ़कर 1.5 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गई। यानि इनकी संपत्ति में हर दिन औसतन 1.3 बिलियन डॉल की रफ्तार से बढ़ोतरी हुई।

कोरोना महामारी से 160 मिलियन लोग गरीब हुए – Oxfam की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी की वजह से दुनियाभर में 160 मिलियन से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने के लिए मजबूर हुए है। जिसमें बड़ी संख्या में महिला और गैर श्वेत नस्ल के लोग है। वहीं Oxfam ने वैश्विक टीकाकरण उत्पादन, स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी, लिंग आधारित हिंसा के उन्मूलन और क्लाइमेट चेंज को लेकर जरूरी कदम उठाने के लिए सुधार की वकालत की है।

Forbes मैगजीन के टॉप 10 अमीरों की लिस्ट

Tesla और SpaceX के चीफ इलॉन मस्क
Amazon के जेफ बेजोस
गूगल के संस्थापक लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन
फेसबुक के मार्क ज़करबर्ग
माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व सीईओ बिल गेट्स और स्टीव बामर
ओरेकल के पूर्व सीईओ लैरी एलिसन
यूएस के दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट
फ्रेंच लग्जरी ग्रुप LVMH के बर्नार्ड अरनॉ

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‘ऑक्सफैम इंटरनेशनल’ की कार्यकारी निदेशक गैब्रिएला बुशेर ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘ वैश्विक महामारी अरबपतियों के लिए अप्रत्याशित रूप से लाभदायक साबित हुई है। जब सरकारों ने बचाव पैकेज की घोषणा की और सभी के लिए अर्थव्यवस्था बेहतर करने के वास्ते अर्थव्यवस्था तथा वित्तीय बाजारों में खरबों लगाए गए, तब उससे हुआ पूरा फायदा अरबपतियों को मिला।’’ बुशेर ने कहा कि टीका निर्माण वैश्विक महामारी की सफलता की कहानियों में से एक है, लेकिन ‘‘अमीर देशों ने टीकों की जमाखोरी की है’’, जो ‘फार्मास्युटिकल’ एकाधिकार सुरक्षित रखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि 10 सबसे धनी लोगों पर एकमुश्त 99 प्रतिशत कर लगाने से 800 अरब डॉलर मिल सकते हैं और इसका इस्तेमाल कई सामाजिक कार्यों के लिए किया जा सकता है। बुशेर ने कहा कि इस पैसे से ‘‘ पूरी दुनिया के लिए टीकों का भुगतान सक्षम होगा, सभी के लिए स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकेंगी।’’

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