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पांच सौ और हजार के बंद नोटों से भरे पड़े हैं सहकारी बैंक

राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने नोटबंदी के फैसले के बाद जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) में भारी मात्रा में पुराने नोट पड़े होने का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में उठाया।

Author नई दिल्ली | March 30, 2017 12:59 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने नोटबंदी के फैसले के बाद जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) में भारी मात्रा में पुराने नोट पड़े होने का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में उठाया। उन्होंने कहा कि उन नोटों को करेंसी चेस्ट में जमा कराने की अनुमति नहीं दिए जाने से किसानों को कर्ज देने में समस्याएं आ रही हैं। पवार ने उच्च सदन में शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया और कहा कि रिजर्व बैंक के एक आदेश के बाद ऐसे बैंकों में भारी मात्रा में पुराने नोट पड़े हैं। उन्होंने कहा कि देश के डीसीसीबी के पास 44 हजार करोड़ रुपए जमा कराए गए। महाराष्ट्र के 31 जिला केंद्रीय सहकारी बंैंकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन बैंकों के पास 4600 करोड़ रुपए जमा हुए। पवार ने कहा कि नए निर्देशों के बाद डीसीसीबी पूरी राशि नहीं जमा कर सके और ऐसे बैंकों के पास 8000 करोड़ रुपए के पुराने नोट थे। उन्होंने कहा कि इन बैंकों को उन नोटों पर ब्याज भी देना होगा, जबकि उन नोटों को नकद जमा का हिस्सा नहीं माना जा रहा है।

पवार ने कहा कि ऐसी स्थिति में बैंकों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है। इसका असर रबी के मौसम में दिए जाने वाले कर्ज पर हुआ है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में किसानों को कर्ज नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि डीसीसीबी के चेस्ट में पुराने नोट पड़े हुए है,ं लेकिन उसे वितरित नहीं किया जा सकता हालांकि उस पर ब्याज देना होगा।
राकांपा नेता ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को भी लिखा है ताकि उन नोटों को करेंसी चेस्ट में जमा कराने की अनुमति मिल सके। उनकी मांग से कई सदस्यों ने खुद को संबद्ध किया।

संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि वह इस मुद्दे से वित्त मंत्री को अवगत करा देंगे। कांग्रेस के टी सुब्बारामी रेड्डी ने शून्यकाल में नोटबंदी के फैसले के कुछ दिन बाद ही नकली नोट मिलने का मुद्दा उठाया और ऐसे नोटों के चलन पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा के उपाय किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दो हजार रुपए और 500 रुपए के नकली नोट मिलना गृह मंत्रालय व अन्य एजंसियों के लिए चुनौती है। उन्होंने कहा कि यह काफी गंभीर मुद्दा है और रिजर्व बैंक व सरकार को ऐसे प्रभावी कदम उठाने चाहिए ताकि भारत-बांग्लादेश सीमा से ऐसे नोटों की हो रही तस्करी पर रोक लग सके। उन्होंने नोटों में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय शुरू करने की भी मांग की।

शून्यकाल में ही तृणमूल कांग्रेस के विवेक गुप्ता ने कहा कि लैपटाप और टैबलेट जैसे उपकरणों के संबंध में विमानन कंपनियों के नियमों में एकरूपता नहीं है। हर विमानन कंपनी का अपना अलग नियम है। उन्होंने कहा कि एकसमान नियम के अभाव में हवाई अड्डों पर अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है। उन्होंने मांग की कि नागर विमानन मंत्रालय को इस संबंध में एकसमान दिशानिर्देश जारी करना चाहिए ताकि यात्रियों में कोई भ्रम की स्थिति नहीं रहे। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि 27 संवेदनशील हवाई अड्डों की सुरक्षा सीआईएसएफ के पास नहीं है।

अवधी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग : उत्तर प्रदेश के एक बड़े हिस्से में प्रचलित अवधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने और उसे संरक्षण प्रदान करने की राज्यसभा में मांग की गई। कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया और कहा कि अवधी उत्तर भारत में एक बड़ी आबादी की भाषा है। उन्होंने कहा कि इस भाषा में गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरित मानस और हनुमान चालीसा सहित कई कालजयी रचनाएं हैं। तिवारी ने कहा अवधी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग करते हुए कहा कि यह भाषा न सिर्फ मजबूत है बल्कि इसका अपना व्याकरण भी है। उन्होंने अपनी कुछ बातें अवधी भाषा में भी की और इसे संवैधानिक दर्जा दिए जाने की मांग की।

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