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कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स पर कंपनियों को फ्रीहैंड देने की तैयारी में केंद्र सरकार, कितनी भी बार बढ़ाया जा सकता है करार

सरकार ने चीन और वियतनाम की तर्ज पर कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को लेकर यह नियम बनाने की कोशिश की है। यही नहीं सरकार ने उस प्रावधान को भी हटा दिया है, जिसमें किसी भी मौजूदा कर्मचारी को कॉन्ट्रैक्ट वर्कर में तब्दील करने पर रोक की बात कही गई थी।

Author Edited By सूर्य प्रकाश नई दिल्ली | Updated: September 21, 2020 10:53 AM
contract workersकॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को लेकर नियम बदलने की तैयारी

केंद्र सरकार की ओर से शनिवार को संसद में पेश किए गए लेबर कोड में कॉन्ट्रेक्ट लेबर के सिस्टम में भी बड़े बदलाव की बात कही गई है। सरकार ने कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स हायर करने के लिए फ्री हैंड देने की बात कही है और उनके लिए लाइसेंसिंग की व्यवस्था आसान की जाएगी। द कोड ऑन ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ और वर्किंग कंडीशंस बिल 2020 के तहत कंपनियां किसी भी स्तर पर कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स की तैनाती कर सकती हैं। सरकार ने कोर और नॉन-कोर ऐक्टिविटीज तय की हैं, लेकिन इसके बाद भी कंपनियों को छूट है कि वे कोर ऐक्टिविटीज में भी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकती हैं।

कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स लेऑफ को लेकर बने कानूनों और ट्रेड यूनियन के लॉ से बाहर रहे हैं। ऐसे में इन वर्कर्स की हायरिंग के जरिए कंपनियों के लिए कामकाज आसान हो सकेगा। कोड ऑन इंडस्ट्रियल रिलेशंस बिल, 2020 के मुताबिक कंपनियों को यह अनुमति होगी कि वे कर्मचारियों को फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर भर्ती कर सकें। इसके लिए किसी सेक्टर पर कोई पाबंदी नहीं होगी। बिल के मुताबिक फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को स्थायी कर्मचारियों की तरह ही फायदे मिल सकेंगे। यही नहीं नौकरी का एक साल पूरा होने पर भी ग्रैच्युटी जैसे फायदे मिलेंगे। फिलहाल स्थायी कर्मचारियों के लिए ग्रैच्युटी पाने की लिमिट कम से कम 5 साल है।

संविदा पर नियुक्त कर्मचारियों के कॉन्ट्रैक्ट को आगे कितनी भी बार और कितने भी समय के लिए बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए सरकार ने कोई सीमा या फिर नंबर तय नहीं किए हैं। कहा जा रहा है कि सरकार ने चीन और वियतनाम की तर्ज पर कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को लेकर यह नियम बनाने की कोशिश की है। यही नहीं सरकार ने उस प्रावधान को भी हटा दिया है, जिसमें किसी भी मौजूदा कर्मचारी को कॉन्ट्रैक्ट वर्कर में तब्दील करने पर रोक की बात कही गई थी। श्रम मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि बीजेडी सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली समिति की ओर से की गई सिफारिशों को भी शामिल किया गया है।

ग्रैच्युटी को लेकर मिली बड़ी राहत: नए सोशल सिक्योरिटी कोड बिल के अनुसार ग्रेच्युटी बेनिफिट लेने के लिए अब 5 साल तक नौकरी करना जरूरी नहीं रहेगा। विभिन्न कैटेगरी वर्कर्स के लिए नए प्रावधान लागू करते हुए नए सिक्योरिटी कोड में ग्रैच्युटी के लिए 5 साल नौकरी की न्यूनतम सीमा को समाप्त कर दिया गया है।

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