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10 महीने के उच्चतम स्तर पर खुदरा महंगाई दर, मांस-मछली, सब्जी-दाल से बढ़ी महंगाई

खुदरा मुद्रास्फीति स्वास्थ्य क्षेत्र में 7.84 प्रतिशत, पुर्निनर्माण एवं मनोरंजन क्षेत्र में 5.54 प्रतिशत तथा व्यक्तिगत देखभाल क्षेत्र में 6.38 प्रतिशत रही।

Author नई दिल्ली | Updated: September 12, 2019 9:48 PM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

मांस-मछली, सब्जियों और दालों के दाम बढ़ने से अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति मामूली बढ़कर 3.21 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह 10 महीने का उच्चतम स्तर है। गुरुवार (12 सितंबर, 2019) को यह जानकारी आधिकारिक आंकड़ों में दी गई। हालांकि, मुद्रास्फीति अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लक्ष्य के दायरे में है, जिससे नीतिगत दरों में कटौती की संभावना बरकरार है।

पिछले महीने जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति 3.15 प्रतिशत थी, जबकि पिछले साल अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति 3.69 प्रतिशत थी। इससे पहले, खुदरा मुद्रास्फीति अक्टूबर 2018 में 3.38 प्रतिशत रही थी।

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के अगस्त के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में खाद्य सामग्री वर्ग में 2.99 प्रतिशत मूल्य वृद्धि रही, जो जुलाई में 2.36 प्रतिशत थी।

खुदरा मुद्रास्फीति स्वास्थ्य क्षेत्र में 7.84 प्रतिशत, पुर्निनर्माण एवं मनोरंजन क्षेत्र में 5.54 प्रतिशत व व्यक्तिगत देखभाल क्षेत्र में 6.38 प्रतिशत रही। शिक्षा क्षेत्र में इसकी दर 6.10 प्रतिशत, मांस और मछली में 8.51 प्रतिशत, दाल व अन्य उत्पादों में 6.94 प्रतिशत और सब्जियों के दाम में 6.90 प्रतिशत वृद्धि रही।

खुदरा मुद्रास्फीति की दर सबसे अधिक असम में 5.79 प्रतिशत रही। इसके बाद कर्नाटक में 5.47 प्रतिशत और उत्तराखंड में 5.28 प्रतिशत रही। खास बात यह रही कि चंडीगढ़ में यह दर शून्य से 0.42 प्रतिशत नीचे रही। इस दौरान देश में ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा मुद्रास्फीति की दर 2.18 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 4.49 प्रतिशत रही।

औद्योगिक उत्पादन वृद्धि जुलाई में सुस्त पड़कर 4.3 प्रतिशत रहीः विनिर्माण क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन से जुलाई महीने में देश की औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर सुस्त पड़कर 4.3 प्रतिशत रह गई। बृहस्पतिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार पर मापी जाने वाली औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर एक साल पहले जुलाई- 2018 में 6.5 प्रतिशत रही थी। हालांकि, इस साल जून की यदि बात की जाये तो औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 1.2 प्रतिशत रही इस लिहाज से जुलाई में यह बढ़कर 4.3 प्रतिशत पर पहुंच गई। इससे पहले मई में यह 4.6 प्रतिशत दर्ज की गई। (पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ)

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