भारत की प्रमुख ज्वेलरी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स इन दिनों गंभीर रेगुलेटरी जांच के घेरे में है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कंपनी पर वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगाए हैं। इस मामले में कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई भी की गई है, जबकि कंपनी ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए अपने वित्तीय खुलासों को सही बताया है।

इसी बीच कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत मिलने के बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने क्या कहा?

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, ‘SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर्स पर बहुत बड़े पैमाने की वित्तीय धोखाधड़ी और पैसे का गबन करने का आरोप लगाया है। इस मामले में जांच शुरू करने में SEBI ने ही 7 महीने लगा दिए। आखिर में जब SEBI की आंख खुली तो उन्होंने आदेश दिया, जिसके बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर्स की खरीद-फरोख्त बंद हुई।’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘2016 में LIC ने राजेश एक्सपोर्ट्स में 1.99% का निवेश किया था। वहीं, 31 मार्च 2026 तक LIC ने राजेश एक्सपोर्ट्स में में 10.80% का निवेश कर दिया। LIC के अलावा छोटे निवेशकों ने भी इस कंपनी में जमकर निवेश किया। फरवरी 2023 में राजेश एक्सपोर्टस का मार्केट कैप 28 हजार करोड़ रुपए था 5 जून 2026 को राजेश एक्सपोर्टस का मार्केट कैपिटलाइजेशन गिरकर 3 हजार करोड़ रुपए हो गयाइस घोटाले में देश के निवेशकों के 25 हजार करोड़ रुपए डूब गए।’

क्या है मामला?

हाल ही में सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के प्रमोटर और सीईओ राजेश मेहता को कंपनी की सिक्योरिटीज में डील करने से रोक दिया। मेहता पर फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में बड़े पैमाने पर गलत जानकारी देने और फंड्स को दूसरी जगह लगाने का आरोप है।

मार्केट रेगुलेटर ने कंपनी को लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशंस के तहत अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, रिलेटेड पार्टी लेन-देन और दूसरे डिस्क्लोजर का सही और सही डिस्क्लोजर करने का भी निर्देश दिया।

यह भी पढ़ें: 97-99% रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप, राजेश एक्सपोर्ट्स पर SEBI के आदेश में क्या है?

मार्केट रेगुलेटर ने 109 पेज के अंतरिम ऑर्डर में कहा कि उसकी जांच में फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में गलत जानकारी देने के साथ-साथ पर्सनल अकाउंट्स और रिलेटेड एंटिटीज के जरिए बिना सही डिस्क्लोजर या सपोर्टिंग डॉक्यूमेंटेशन के फंड्स को रूट करने और लेयरिंग करने के मामले सामने आए हैं। यहां पढ़ें पूरी खबर…