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जीएसटी में देरी, 12 लाख करोड़ के नुकसान की भरपाई कौन करेगा: कांग्रेस

विपक्षी दल के रूप में भाजपा पर जीएसटी का मार्ग बाधित करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को कहा कि इस महत्वपूर्ण कर सुधार में सात-आठ वर्ष की देरी के कारण 12 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है और इस नुकसाई की भरपाई कौन करेगा ?

Author नई दिल्ली | Updated: March 30, 2017 12:07 PM
कांग्रेस सदस्य एम वीरप्पा मोइली

विपक्षी दल के रूप में भाजपा पर जीएसटी का मार्ग बाधित करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को कहा कि इस महत्वपूर्ण कर सुधार में सात-आठ वर्ष की देरी के कारण 12 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है और इस नुकसाई की भरपाई कौन करेगा ? लोकसभा में जीएसटी संबंधी विधेयकों पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस सदस्य एम वीरप्पा मोइली ने कहा कि राजग सरकार इसे क्रांतिकारी कर सुधार पहल बता रही है लेकिन इन विधेयकों के प्रावधानों से स्पष्ट है कि यह कोई गेम चेंजर नहीं बल्कि आगे की ओर एक छोटा सा कदम भर है। प्रस्तावित जीएसटी प्रणाली के प्रावधानों की आलोचना करते हुए मोइली ने कहा कि यह प्रौद्योगिकी दु:स्वप्न होगा और इसके प्रावधान बेहद अघातकारी हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत संप्रग सरकार जीएसटी विधेयक को लाई थी। लेकिन उस समय उन लोगों ने इसका विरोध किया था जो आज सत्ता में है। इसके सात-आठ वर्ष गुजर गए। देश को प्रतिवर्ष 1.5 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इस अवधि में करीब 12 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा। कांग्र्रेस नेता ने कहा कि जीएसटी के प्रस्तावित प्रावधान इसकी मूल भावना के विपरीत हैं और कई तरह के कर, उपकर और सरचार्ज बने रहने के कारण एक राष्ट्र, एक कर की अवधारणा मिथक ही हैं। वस्तुओं की अंतर राज्य आवाजाही के बारे में जो प्रावधान किए गए हैं, वह लालफीताशाही को बढ़ावा देने वाले हैं। जीएसटी में उच्च कर प्रावधान उद्योगों पर आघात करने वाले हैं। मोइली ने कहा कि इसे राज्यसभा में विचार के लिए नहीं लाया जाना आघात है। यह बहुमत का दुरुपयोग है।

जीएसटी का फैसला ह्यएक छोटा कदम होने के कांग्रेस नेता मोइली के आरोप को खारिज करते हुए भाजपा के उदित राज ने जीएसटी को बड़े बदलाव लाने वाला विधेयक बताया और कहा कि एक जुलाई से देश में जीएसटी लागू होने के बाद बड़ी आर्थिक क्रांति आएगी और एक समान कर व्यवस्था के प्रभाव में आने के साथ देश की 125 करोड़ आबादी को लाभ मिलेगा और हम भ्रष्टाचार मुक्त भारत की ओर बढ़ेंगे। जीएसटी आने से निवेश भी बढ़ेगा और कर चोरी रुकेगी। भाजपा सांसद ने कहा कि जीएसटी आने में देरी की वजह से 12 लाख करोड़ रुपए के नुकसान की बात विपक्ष की ओर से कही जा रही है लेकिन यह बात भी साफ होनी चाहिए कि इस देरी के लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं।

अन्नाद्रमुक के टीजी वेंकटेश बाबू ने कहा कि जीएसटी में कुछ क्षेत्रोंं पर अधिक ध्यान दिया गया है लेकिन कई क्षेत्र अब भी हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है जिनमें बैंकिंग, वित्त, बीमा, आइटी, परिवहन, आभूषण और एमएसएमई आदि क्षेत्र हैं। जीएसटी देश में 1947 के बाद सबसे बड़ा आर्थिक सुधार होगा लेकिन बहुत चुनौतियां भी हैं। वेंकटेश ने पूर्व में जीएसटी पर तमिलनाडु राज्य की आपत्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सरकार को राज्यों को दिए जाने वाले मुआवजे, उसके तरीके और अवधि, रेवेन्यू न्यूट्रल रेट

(आरएनआर) और दोहरा प्रशासनिक नियंत्रण आदि मुद्दों पर सभी राज्यों से परामर्श करना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने जीएसटी में राज्यों की तमाम आपत्तियां दूर होने की बात तो कही लेकिन इसके क्रियान्वयन पर चिंता जताते हुए कहा कि इस मामले में दूसरे देशों की गलतियों से सीखना होगा। बनर्जी ने कहा कि जीएसटी को लेकर कर फिटमेंट प्रक्रिया जल्द शुरू की जानी चाहिए ताकि उद्योगों को कर ढांचे के बारे में जानकारी मिले और वे तैयारी कर लें। छोटे कारोबारियों को जीएसटी के लिहाज से तैयार होने के लिए थोड़ा समय और देना चाहिए।

बीजू जनता दल के भर्तृहरि मेहताब ने कहा कि उपभोक्ताओं को जीएसटी से भारी लाभ होने की जो बड़ी बड़ी उम्मीदें पैदा कर दी गई हैं, वे भ्रम माÞत्र हैं। मेहताब ने कहा कि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा समेत चार राज्यों ने जीएसटी के प्रावधानों का विरोध किया था लेकिन जीएसटी परिषद ने उनकी आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया। शिवसेना के आनंद राव अड़सुल ने जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों को होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई की व्यवस्था की सराहना की लेकिन साथ ही कहा कि यह केवल पांच साल के लिए है। उनका सवाल था कि इसके बाद क्या होगा? तेलुगू देशम पार्टी के जयदेव गल्ला ने कहा कि जीएसटी के लागू होने से 1991 का इंस्पेक्टर राज समाप्त होगा। माकपा के मोहम्मद सलीम ने कहा कि हमारी राजनीति और अर्थनीति कदम से कदम मिलाकर चलनी चाहिए। लेकिन आज ऐसा नहीं हो रहा है।

सपा के मुलायम सिंह यादव ने कहा कि हम चाहे जितने भी कानून बना लें लेकिन जब तक किसानों को मजबूत नहीं बनाया जाएगा तब तक देश मजबूत नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कितने शर्म की बात है कि गरीब को खाना नहीं मिल रहा है, कर्ज के कारण आज आत्महत्याएं हो रही हैं। वाईएसआर कांग्रेस के वारा प्रसाद राव ने कहा कि जीएसटी लागू होने की स्थिति में घाटा उठाने वाले राज्यों को लक्जरी उत्पादों पर उपकर के जरिये नुकसाई की भरपाई और मुआवजे की बात कही गई है लेकिन अगर राज्यों को ज्याद नुकसान होगा तब क्या लक्जरी उत्पादों से नुकसाई की भरपाई की जा सकेगी।

राकांपा की सुप्रिया सुले ने कहा कि यह अच्छी आर्थिक सुधार पहल है और महाराष्ट्र इसके लिए पूरी तरह से तैयार है। भाजपा के रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि जीएसटी लागू होने से देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 1.5 से 2 फीसद की वृद्धि दर्ज होगी। प्रकियाएं सरल होंगी और भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मुकाबला कर सकेगा। यह टीम इंडिया और सबका साथ, सबका विकास की भावना को मजबूत बनाएगा। राजद के जय प्रकाश नारायण यादव ने कहा कि एक राष्ट्र, एक कर एक सुनहरा नारा है लेकिन उन्हें शंका है कि यह गरीबों के सशक्तीकरण में किसी प्रकार से सहायक होगा। उन्होंने कहा कि इसके कारण महंगाई में वृद्धि होगी और खेती, किसानी प्रभावित होगी।

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