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‘रंजीत सिन्हा ने दिया था कोयला ब्लॉक मामला बंद करने का आदेश’

सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त समिति रंजीत सिन्हा की भूमिका की जांच कर रही है कि क्या उनके फैसलों से कोयला ब्लॉक आबंटन घोटाले की जांच प्रभावित हुई।

Author नई दिल्ली | May 23, 2016 03:01 am
पूर्व सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा। (फाइल फोटो)

कोयला ब्लॉक आबंटन घोटाला मामले के एक जांचकर्ता ने एक विशेष अदालत को बताया कि इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर करने का आदेश तत्कालीन सीबीआइ प्रमुख रंजीत सिन्हा ने दिया था। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त समिति सिन्हा की भूमिका की जांच कर रही है कि क्या उनके फैसलों से जांच प्रभावित हुई। जांच अधिकारी मामले में अभियोजन के गवाह के रूप में अपना बयान दर्ज करा रहा था। यह मामला मध्य प्रदेश आधारित कमल स्पंज स्टील एंड पॉवर लिमिटेड (केएसएसपीएल) और अन्य से जुड़ा है। इसमें अदालत ने सीबीआइ की ओर से दायर क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और मुकदमे पर आगे बढ़ रही है। सीबीआई ने प्राथमिकी में आरोपियों के रूप में केएसएसपीएल, इसके निदेशकों, पवन, कमलजीत आहलूवालिया, प्रशांत आहलूवालिया, अमित गोयल और कुछ अज्ञात लोकसेवकों का नाम लिया था।

इन पर कोयला ब्लॉक हासिल करने के लिए कथित तौर पर नेटवर्थ को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने सहित तथ्यों को गलत तरह से पेश करने का आरोप है। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि जांच पूरी करने के बाद उन्होंने रिपोर्ट अपने वरिष्ठ अधिकारी को सौंप दी थी लेकिन ‘सक्षम प्राधिकार’ से मामले को बंद करने का अंतिम आदेश मिला। सीबीआइ न्यायाधीश के यह पूछने पर कि ‘सक्षम प्राधिकार’ कौन है, क्लोजर रिपोर्ट दायर करने का आदेश किसने दिया था, डीएसपी संजय दुबे ने कहा, ‘रंजीत सिन्हा, तत्कालीन सीबीआइ निदेशक।’

सीबीआइ निदेशक के अपने कार्यकाल में सिन्हा की अपने आवास पर कोयला ब्लॉक आबंटन के कुछ आरोपियों से कथित मुलाकात से उत्पन्न विवाद के चलते वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। अदालत ने मामले को देखने के लिए एक समिति गठित कर दी थी। एजंसी के पूर्व विशेष निदेशक एमएल शर्मा के नेतृत्व वाली समिति शीर्ष अदालत को प्रारंभिक रिपोर्ट दे चुकी है। समिति अब भी इन आरोपों की जांच कर रही है कि आरोपियों और अन्य के साथ सिन्हा की बैठकों से कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में जांच प्रभावित हुई।

जांच अधिकारी ने कहा, ‘सभी आवश्यक जांच पूरी होने पर मैंने अपनी रिपोर्ट सीबीआइ में अपने वरिष्ठ अधिकारी को सौंप दी। हालांकि तत्कालीन सक्षम प्राधिकार से सभी आरोपियों के खिलाफ मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर करने का अंतिम आदेश मिला। तदनुसार, मैंने 27 मार्च 2014 को अदालत में क्लोजर रिपोर्ट के रूप में अंतिम रिपोर्ट दायर की।’

यह मामला केएसएसपीएल को मध्य प्रदेश में थेसगोरा-बी रूद्रपुरी कोयला ब्लॉक के आबंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। अदालत ने मध्य प्रदेश आधारित कंपनी और इसके प्रबंध निदेशक पवन कुमार आहलूवालिया, वरिष्ठ अधिकारी और चार्टर्ड एकाउंटेंट अमित गोयल, पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्त और दो सरकारी अधिकारियों को आरोपी के रूप में तलब किया था। आरोपी के रूप में जिन अन्य दो अधिकारियों को समन जारी किया गया था, वे कोयला मंत्रालय के तत्कालीन सचिव केएस क्रोफा और एक इसके तत्कालीन निदेशक केसी समरिया थे। ये आरोपी भादंसं की धारा-120 (बी) (आपराधिक साजिश) 420 (धोखाधड़ी), 409 (लोकसेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत कथित अपराधों के लिए मुकदमे का सामना कर रहे हैं।

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