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कोयला घोटाला: CBI ने सीलबंद लिफाफे में पेश की प्रगति रिपोर्ट

सीबीआई ने पूर्व कोयला सचिव पी सी पारेख समेत कई अन्य लोगों की कथित संलिप्तता वाले कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में जांच की प्रगति रिपोर्ट आज एक सीलबंद लिफाफे में डालकर विशेष अदालत को सौंप दी। एजेंसी ने अदालत को बताया कि वे आगे की जांच के दौरान दर्ज किए गए विभिन्न लोगों के […]

Author January 27, 2015 2:17 PM

सीबीआई ने पूर्व कोयला सचिव पी सी पारेख समेत कई अन्य लोगों की कथित संलिप्तता वाले कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में जांच की प्रगति रिपोर्ट आज एक सीलबंद लिफाफे में डालकर विशेष अदालत को सौंप दी।

एजेंसी ने अदालत को बताया कि वे आगे की जांच के दौरान दर्ज किए गए विभिन्न लोगों के बयान भी पेश कर रही है और सीबीआई न्यायाधीश से अनुरोध करती है कि जब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह इस सीलबंद लिफाफे को नहीं खोले। यह प्रगति रिपोर्ट अदालत द्वारा 16 दिसंबर 2014 को जारी किए गए आदेश का पालन करते हुए पेश की गई है।

उस आदेश में अदालत ने एजेंसी को निर्देश दिए थे कि वह पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री कार्यालय के कुछ अन्य शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ करे। विशेष सीबीआई न्यायाधीश भरत पराशर ने कहा, आगे की जांच से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट को, जांच के दौरान दर्ज किए गए विभिन्न लोगों के बयानों और कुछ दस्तावेजों के साथ एक सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपा गया है। अदालत के समक्ष प्रगति रिपोर्ट पेश करते हुए वरिष्ठ सरकारी वकील वी के शर्मा ने कहा कि उन्होंने न्यायाधीश द्वारा 16 दिसंबर को जारी किए गए आदेश का पालन किया है। शर्मा ने अदालत को बताया कि एजेंसी को चल रही जांच को पूरा करने के लिए दो सप्ताह का समय चाहिए।

न्यायाधीश ने इस मामले की सुनवाई के लिए 19 फरवरी का दिन निश्चित किया। अदालत द्वारा 16 दिसंबर को पारित किए गए आदेश के बाद सीबीआई ने इस मामले के संबंध में मनमोहन सिंह, सिंह के तत्कालीन प्रमुख सचिव टीकेए नायर और पूर्व प्रधानमंत्री के तत्कालीन निजी सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम एवं अन्य के बयान दर्ज किए थे।

यह मामला उड़ीसा में तालाबीरा-2 के कोयला ब्लॉक का आवंटन वर्ष 2005 में हिंडाल्को नामक कंपनी को किए जाने से जुड़ा है। सीबीआई ने पहले पूर्व कोयला सचिव पी सी पारेख, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अन्य अज्ञात लोगों एवं अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। यह प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत दर्ज की गई थी। बाद में सीबीआई ने पिछले साल 27 अगस्त को एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी, जिसका कहना था कि हिंडाल्को को तालाबीरा-2 कोयला ब्लॉक के आवंटन की पूरी प्रक्रिया में शामिल कोई भी व्यक्ति आपराधिक गतिविधि में संलिप्त नहीं था।

 

 

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