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कोयला घोटाला: दो निदेशकों को 4 साल की कैद, जेआइपीएल पर 25 लाख का जुर्माना

कोयला घोटाले से जुड़े विभिन्न मामलों में यह पहला प्रकरण है जिसमें दोनों रूंगटा और जेआईपीएल को दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई।

Author नई दिल्ली | April 4, 2016 23:54 pm
कोयला घोटला। विशेष अदालत ने कहा कि इन अनैतिक कार्य करने वाले कारोबारियों के कारण ही भारत विकास में पिछड़ा हुआ है।

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने कोयला ब्लॉक आबंटन घोटाला मामले में झारखंड इस्पात प्राइवेट लि. (जेआइपीएल)के निदेशक आरसी रूंगटा और आरएस रूंगटा को सोमवार को चार चार साल की कैद की सजा सुनाई। विशेष अदालत ने कहा कि इन अनैतिक कार्य करने वाले कारोबारियों के कारण ही भारत विकास में पिछड़ा हुआ है।

सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने इस घोटले से जुड़े किसी मामले में पहली सजा सुनाते हुए कहा कि इस प्रकार के ‘सफेदपोश अपराध’ साधारण अपराधों की तुलना में समाज के लिये ज्यादा खतरनाक है क्योंकि ऐसे अपराधों में वित्तीय नुकसान कहीं अधिक होता है और सार्वजनिक नैतिकता की क्षति होती है। अदालत ने यह भी कहा कि कोयला औद्योगिक और बुनियादी ढांचा भारत जैसे विकासशील देशों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

सजा पर अपने 15 पृष्ठ के आदेश में अदालत ने कहा- इस प्रकार के अनैतिक कार्य करने वाले कारोबारियों और उद्योगपतियों के कारण ही आजादी के 69 साल बाद हमारा देश औद्योगिक : बुनियादी ढांचा विकास के मामले में दुनिया के अधिकतर देशों से पीछे है। अदालत ने जेल की सजा के अलावा आरएस रूंगटा (79) और आरसी रूंगटा(60) पर पांच -पांच लाख रुपए का भी जुर्माना लगाया। सभी आरोपी झारखंड में कोयला ब्लॉक हासिल करने के लिये भारती दंड संहिता की धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़े प्रावधानों के तहत दोषी ठहराए गए हैं।

आरसी रूंगटा और आरएस रूंगटा के अलावा अदालत ने मामले में दोषी जेआइपीएल पर 25 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि दोनों रूंगटा के मामले में अगर वे जुर्माना नहीं देते हैं, उन्हें एक-एक साल की सजा और भुगतनी होगी। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों अदालत में मौजूद थे।

कोयला घोटाले से जुड़े विभिन्न मामलों में यह पहला प्रकरण है जिसमें दोनों रूंगटा और जेआईपीएल को दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई। अदालत ने 28 मार्च को अपने फैसले में कहा कि आरोपियों ने झारखंड में कंपनी को उत्तरी धादू कोयला ब्लॉक आबंटित करवाने में धोखाधड़ी की और बेईमानी के इरादे से सरकार को धोखा दिया।

मामला 27वीं और 30वीं जांच समिति द्वारा उत्तरी धादू कोयला ब्लॉक संयुक्त रूप से जेआइपीएल और तीन अन्य कंपनियों मेसर्स इलेक्ट्रो स्टील कास्टिंग लि., मेसर्स आधुनिक एलॉयज एंड पावर लि. और मेसर्स पवनजय स्टील एंड पावर लि. को आबंटित किये जाने में कथित अनियमितता से जुड़ा है। इससे पहले, अदालत दो अन्य आरोपियों रामअवतार केडिया और नरेश महतो को भी जेआइपीएल और दोनों रूंगटा को तलब किया था।

बाद में अदालत को सूचित किया गया कि केडिया और महतो का निधन हो गया है। उसके बाद उनके खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई। कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में सीबीआइ द्वारा जांच किए गए 19 अन्य मामले अदालत के समक्ष लंबित हैं। इस अदालत का गठन विशेष रूप से कोयला घोटाला मामले की सुनवाई के लिए किया गया है। इसके अलावा ईडी द्वारा जांच किए गए दो मामले भी अदालत के समक्ष लंबित हैं।

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