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कोयला मंत्रालय ने खदानों के बारे में कानून मंत्रालय से मांगा स्पष्टीकरण

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय के फैसले के मद्देनजर कोयला मंत्रालय ने कोयला खानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर कानून मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा है। इसमें अन्य बातों के अलावा पूछा गया है कि क्या खानों का आबंटन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और नये संयंत्रों को किया जा सकता है। उच्चतम न्यायालय ने 1993 से विभिन्न […]

Updated: October 2, 2014 4:51 PM

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय के फैसले के मद्देनजर कोयला मंत्रालय ने कोयला खानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर कानून मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा है। इसमें अन्य बातों के अलावा पूछा गया है कि क्या खानों का आबंटन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और नये संयंत्रों को किया जा सकता है।

उच्चतम न्यायालय ने 1993 से विभिन्न कंपनियों को आबंटित 214 कोयला खानों का आबंटन रद्द करने के निर्णय किया है। उसके बाद मंत्रालय ने कानून मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा है।

एक सूत्र ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय को देखते हुए कोयला मंत्रालय ने विभिन्न मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा है। इसमें अन्य बातों के अलावा यह पूछा गया है कि क्या खनन के लिये कोयला खदानों का आबंटन केंद्र या राज्य सरकार के उपक्रमों को किया जा सकता है।

सूत्र ने यह भी कहा कि इस बारे में भी स्पष्टीकरण मांगा गया है कि क्या कोयला खानों का आबंटन एक से अधिक कंपनियों या दो अथवा चार कंपनियों के समूह को संयुक्त रूप से किया जा सकता है और क्या खानों का आबंटन नये संयंत्रों को किया जा सकता है।

न्यायालय ने पिछले महीने 1993 से आबंटित 218 कोयला खानों में से 214 का आबंटन रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत का कहना था कि उन खदानों का आबंटन गलत और मनमाने तरीके से किया गया। साथ ही केंद्र को परिचालन वाले 42 खानों की जिम्मेदारी केंद्र को लेने की अनुमति दे दी।

 

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