ताज़ा खबर
 

मुकेश अंबानी की Jio को COAI ने लिखी कड़ी चिट्ठी, कहा- आपने पिछले दरवाजे से ले ली टेलिकॉम सेक्टर में एंट्री

रिलायंस जियो ने अपने पत्र में सुझाव दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के तीन रिटायर जजों की एक कमेटी बनाई जाए जो इस बात की जांच करे कि सीओएआई की नियम-कानून तार्किकता, निष्पक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता के लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर खरे उतरते हैं या नहीं।
प्रतीकात्मक तस्वीर

रिलायंस जियो के मोबाइल-इंटरनेट बाजार में उतरते ही इस सेक्टर में कारोबारी जंग शुरू हो गई है। पहले रिलायंस ने आरोप लगाया था कि कुछ मोबाइल कंपनियां जानबूझकर कर रिलायंस जियो से किए जाने वाले फोन में व्यवधान पैदा कर रही हैं। उसके बाद जियो के अधिकारियों ने ये आरोप भी लगाया कि कुछ कंपनियां जियो में अपना मोबाइल नंबर पोर्ट कराने वाले उपभोक्ताओं को भी हतोत्साहित कर रही हैं। हालांकि दूसरी कंपनियों ने रिलायंस जियो के इन आरोपों को गलत बताया। इस विवाद की ताजा कड़ी में रिलायंस जियो ने आरोप लगाया है कि सेलुलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेलुलर की तरफदारी कर रहा है। इस आरोप पर पलटवार करते हुए सीओएआई ने कहा कि रिलायंस जियो ने इस सेक्टर में पिछले दरवाजे से प्रवेश लिया है और उसके आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।

जियो 23 सितंबर को सीओएआी के चेयरमैन गोपाल विट्टल और डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यू को पत्र लिखकर संस्था के नियमों में बदलाव की मांग की थी। गोपाल भारती एयरटेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हैं। जियो ने अपने पत्र में सुझाव दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के तीन रिटायर जजों की एक कमेटी बनाई जाए जो इस बात की जांच करे कि सीओएआई की नियम-कानून तार्किकता, निष्पक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता के लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर खरे उतरते हैं या नहीं। जियो ने आरोप लगाया कि सीओएआई के मौजूदा नियम-कानून बाजार के तीन सबसे बड़े हिस्सेदारों (IDO) का पक्षपात करते हैं। पत्र में कहा गया कि कारोबार और बाजार में स्थिति के बदौलत संस्था के कार्यकारी समिति में इन तीनों बड़ी कंपनियों का 68 प्रतिशत वोटों पर अधिकार है।

जियो के पत्र के जवाब में सीओएआई के राजन मैथ्यू ने 25 सितंबर को जवाबी खत लिखा। मैथ्यू ने अपने खत में लिखा कि उचित मंच मौजूद होने के बावजूद ऐसा खत लिखना जियो के लिए शोभनीय नहीं है। मैथ्यू ने जवाबी पत्र में कहा कि जियो सीओएआई के नियमों और तथ्यों को गलत अर्थ निकाल रही है जिससे संस्था पूरी तरह असहमत है। मैथ्यू ने कहा कि जियो संस्था पर ऐसे आरोप लगा रही है जो पिछले पांच साल में इस बाजार में आने वाले किसी नई कंपनी ने नहीं लगाए। मैथ्यू ने पत्र में कहा, “लगातार और गंभीर उकसावों के बावजूद पिछले दरवाजे से इस सेक्टर में घुसने वाले रिलायंस जियो को सीओएआई का पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया।” मैथ्यू ने कहा कि रिलायंस जियो को सीओएआई का सदस्य बनने से पहले संस्था के सभी नियम-कानून पता थे।

एयरटेल, वोडाफोन व जियो ने TRAI को सौंपी कॉल ट्रैफिक डीटेल

सीओएआई के पत्र में कहा गया है कि रिलायंस जियो यूनाइटेड एक्सेस सर्विस लाइसेंस( UASL) या यूनाफाइड लाइसेंस (UL) की बोली में शामिल भी नहीं था और उसने एक दूसरी कंपनी के माध्यम से ब्रॉडबैंड वायरलैस सर्विस (BWA) लेकर उसे UASL लाइसेंस में बदलवा लिया। जिसकी नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) समेत कई लोगों ने आलोचना की है। पत्र में कहा गया है कि इस “हेराफेरी’ के बावजूद जियो का सीओएआई में स्वागत किया गया और उसे नई शुरुआत के लिए बधाई दी गई।

रिलायंस जियो और अन्य कंपनियों के बीच ये विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। जियो ने अपने पत्र की प्रति दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा, दूरसंचार सचिव जेएस दीपक, दूरसंचार नियामक संस्था ट्राई के चैयरमैन आरएस शर्मा और सीओओआई के मुख्य सदस्य ऑपरेटरों को भेजा है। जियो ने पत्र में ‘सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860’ और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया है।

रिलायंस जियो का आरोप- एयरटेल, आइडिया और वोडाफोन नहीं दे रहीं मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सुविधा

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App