ताज़ा खबर
 

ऐप्स बैन किए पर 5जी नेटवर्क से चीनी कंपनियों को बाहर करने का नहीं है कोई प्लान, मंत्री ने दी जानकारी

5जी नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर के कॉन्ट्रैक्ट्स से चीनी कंपनियों हुवावे टेक्नॉलजी और ZTE को अलग रखने का कोई प्लान नहीं है। मंत्रालय के इस बयान से टेलिकॉम कंपनियों के लिए चिंताएं और बढ़ गई हैं।

Author Edited By सूर्य प्रकाश नई दिल्ली | Updated: September 18, 2020 10:57 AM
5g technique5जी तकनीक से चीनी कंपनियों को बाहर करने पर अभी नहीं हुआ कोई फैसला

बीते कुछ दिनों में भले ही केंद्र सरकार ने चीनी कंपनियों के मोबाइल ऐप्स पर बैन लगाया है, लेकिन 5जी नेटवर्क में सरकार बनाए रखना चाहती है। इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने यह जानकारी दी है। संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में उन्होंने कहा कि 5जी नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर के कॉन्ट्रैक्ट्स से चीनी कंपनियों हुवावे टेक्नॉलजी और ZTE को अलग रखने का कोई प्लान नहीं है। मंत्रालय के इस बयान से टेलिकॉम कंपनियों के लिए चिंताएं और बढ़ गई हैं। अभी सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है और बाद में उन्हें बैन करने का निर्णय होता है तो फिर टेलिकॉम कंपनियों को परेशानी होगी। आईटी मामलों की संसदीय समिति के समक्ष टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने कहा है कि इस पर अंतिम फैसला होम मिनिस्ट्री को ही लेना है।

सीमा पर तनाव बढ़ने से पहले भी अमेरिका की ओर से भारत पर यह दबाव डाला जा रहा था कि उसे चीनी कंपनियों को 5जी तकनीक से दूर रखना चाहिए। अमेरिका का आरोप है कि चीनी कंपनियां तकनीक का इस्तेमाल जासूसी के लिए कर रही हैं। हालांकि तमाम चीनी ऐप्स को बैन करने के बाद भी न तो टेलिकॉम डिपार्टमेंट और न ही किसी अन्य सरकारी विभाग ने चीनी कंपनियों से टेलिकॉम उपकरण लेने को लेकर अपनी नीति स्पष्ट की है। टेलिकॉम कंपनियों का कहना है कि य़दि सरकार उन्हें अपनी राय स्पष्ट कर दे तो वह चीनी कंपनियों के साथ मिलकर काम करने के अपने ऐप्लिकेशंस को वापस भी ले सकती हैं। लेकिन कोई स्पष्ट नीति न देखते हुए टेलिकॉम फर्म्स ने चीनी कंपनियों के साथ आगे बढ़ने का फैसला लिया है।

बिजनेस स्टैंडर्ड ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि एयरटेल और रिलायंस जियो ने बेंगलुरु में 5जी इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए हुवावे के साथ करार किया है। इसके अलावा वोडाफोन आइडिया ने दिल्ली सर्कल के लिए ऐसा ही करार किया है। एक अन्य चीनी कंपनी ZTE ने एयरटेल के साथ कोलकाता के लिए करार किया है।

हालांकि जुलाई में टेलिकॉम कंपनियां नए ऐप्लिकेशन देने को तैयार थीं और चीनी कंपनियों की बजाय अन्य फर्म्स को साथ लेने की तैयारी में थीं, जैसे- नोकिया, एरिक्सन या सैमसंग। उदाहरण के तौर पर एयरटेल ने बेंगलुरु में एरिक्सन के साथ आवेदन किया था, जबकि कोलकाता में नोकिया के साथ ऐप्लिकेशन दिया था।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 सिर्फ 4 महीनों में बेरोजगार हुए 66 लाख इंजीनियर, टीचर, अकाउंटेंट जैसे पेशवर लोग, मजदूरों पर भी बड़ी मार
2 दुनिया की 100 दिग्गज कंपनियों में चीनी हैकर्स की घुसपैठ, ड्रैगन को रणनीति बनाने में करते हैं मदद
3 Happiest Minds के संस्थापक अशोक सूता रहे हैं अजीम प्रेमजी के प्रशंसक, 1999 में छो़ड़ा था साथ
यह पढ़ा क्या?
X