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28 साल के सबसे खराब दौर में चीन की अर्थव्यवस्था! विकास दर के मामले में ड्रैगन से आगे निकला भारत

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में चीन की अर्थव्यवस्था की यह हालत उसके पिछले 28 साल में सबसे कमजोर बताई गयी है। बैंक ने कहा कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की आर्थिक नीतियां चुनौतियों के घेरे में हैं।

भारत के मुकाबले विकास दर में पिछड़ा चीन. (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

भारत ने विकास दर की प्रतिस्पर्धा में चीन को पीछे छोड़ दिया है। चीन अपने 28 साल के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। जबकि, भारत मामूली उतार-चढ़ाव के बावजूद विकास दर को संभाले हुए है। मूडीज और वर्ल्ड बैंक के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था 2018-19 में 7.3 फीसदी के विकास दर से आगे बढ़ रही है और माना जा रहा है कि 2019-20 में यह 7.5 फीसदी का ग्रोथ हासिल कर लेगी। वहीं, चीन 2018-19 में विकास दर 6.2 फीसदी है। रॉयटर्स के मुताबिक वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट में चीन का अनुमानित विकास दर इस साल 6.5 फीसदी तक रह सकता है।

चीन के विकास दर में कमी अमेरिका के साथ व्यापारिक मतभेद बड़ा कारण बताया जा रहा है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में चीन की अर्थव्यवस्था की यह हालत उसके पिछले 28 साल में सबसे कमजोर बताई गयी है। बैंक ने कहा कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की  आर्थिक नीतियां चुनौतियों के घेरे में हैं। उसे वैश्विक स्तर पर ट्रेड से जुड़े झंझटों को दूर करने के साथ-साथ व्यापारिक जोखिमों पर नियंत्रण रखना होगा। चीन के ग्रोथ में वस्तु उपभोग एक बड़ी वजह है। मगर, कमजोर निवेश, वैश्विक स्तर पर घटता डिमांग और चीनी सामान के निर्यात पर अमेरिका का अधिक टैक्स का बोझ पिछड़ने का बड़ा कारण है। ऐसे में उसे अपनी अर्थव्यवस्था को सुस्ती से उबारने के लिए घरेलू उपभोग पर ज्यादा बल देना होगा।

भारत के संदर्भ में वर्ल्ड बैंक का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी के शुरुआती झटकों के बावजूद भारत ने अपनी विकास दर को संभाले रखा है। भारत के लिए निजी निवेश और निर्यात इसके ग्रोथ में अहम स्तंभ साबित हुए हैं। दुनिया के सभी आर्थिक संस्थानों ने भारत के आर्थिक ग्रोथ को दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले स्थिर, टिकाऊ और बहुआयामी बताया है।

हालांकि, भारत के संदर्भ में दुनिया के वरिष्ठ अर्थशात्रियों का मानना है कि यह 8 फीसदी से भी अधिक का विकास दर हासिल कर सकता है। वर्ल्ड बैंक ने भी माना है कि कुछ जरूरी सुधार करके भारत 8 फसदी से अधिक का लक्ष्य हासिल कर सकता है। क्योंकि, वर्तमान हालात में वैश्व की तुलना में भारत को 8 फीसदी का ग्रोथ बेहद जरूरी है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी भारत में युवाओं को जॉब की चुनौतियों से निपटने के लिए 8 फीसदी से अधिक के ग्रोथ को अनिवार्य बताया था।

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