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चीन में प्रतिबंधित ‘फालुन दाफा’ का विश्व पुस्तक मेले में प्रचार

दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले के एक स्टॉल पर प्राचीन चीनी ध्यान पद्धति ‘फालुन दाफा’ का प्रचार किया जा रहा है जिसे चीन ने प्रतिबंधित कर रखा है।
Author नई दिल्ली | January 13, 2016 23:14 pm
विश्व पुस्तक मेले में किताब देखते आगंतुक। (पीटीआई फाइल फोटो)

दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले के एक स्टॉल पर प्राचीन चीनी ध्यान पद्धति ‘फालुन दाफा’ का प्रचार किया जा रहा है जिसे चीन ने प्रतिबंधित कर रखा है। इस मेले में चीन विशेष मेहमान के तौर पर शिरकत कर रहा है। देशभर में फालुन दाफा एसोसिएशन आॅफ इंडिया के सदस्य फैले हुए हैं। यहां पर इस पद्धति से जुड़ी पुस्तकें वितरित की जा रही हैं जो कि ‘सत्यता, करुणा और सहिष्णुता’ के सिद्धांत की वकालत करती हैं। इन पुस्तकों में इस पद्धति को लेकर चीनी समाज में पिछले कुछ सालों में हुए शोधों का ब्योरा है। डेविड माटास और डेविड किलगौर की ‘ब्लडी हार्वेस्ट : आॅर्गन हार्वेस्टिंग आॅफ फालुन गॉन्ग प्रैक्टिशनर्स इन चाइना’, ईथन गटमन की ‘द स्लॉटर’ और डेविड माटास एवं टॉर्स्टेन ट्रे की ‘स्टेट आॅर्गन्स : ट्रांसप्लांट एबयूज इन चाइना’ नाम की यह तीन किताबें उन लोगों की कहानी बयां करती हैं जिन्हें इस ध्यान पद्धति का अभ्यास करने के लिए जेल में डाल दिया गया।

इस पद्धति के प्रचारकों का कहना है कि इस प्रचार का लक्ष्य चीन में कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा किए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघनों के बारे में लोगों को जागरूक करना है। आठ साल से भारत में रह रहे आॅस्ट्रेलियाई नागरिक मार्क लुबेरिक इस घटनाक्रम से जुड़ी घटनाओं को विस्तार से बताते हैं। वह बताते हैं कि काम के दबाव के कारण उन्हें हुक्का और शराब की लत लग गई थी लेकिन जब उनके एक दोस्त ने इस विधा से उनका परिचय कराया तो उन्होंने शराब को अलविदा कह दिया। विश्वभर में लगभग 120 देशों में फालुन दाफा को अपनाने वाले लोग हैं। लुबेरिक ने बताया कि वर्ष 1999 में चीन ने इस विधा को प्रतिबंधित कर दिया था और इसका अभ्यास करने वाले लोगों को जेल में डाल दिया था। वर्ष 1992 में जब यह शुरू हुई तो कम्युनिस्ट पार्टी इसका बहुत समर्थन करती थी लेकिन बाद में वह इसे खतरे के तौर पर देखने लगी।

वर्ष 1999 में चीन की सरकार ने इस विधा के अभ्यास को अवैध बनाने के लिए अभियान चलाया। यहां पुस्तक मेले में यह किताबें अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं।

  • चीन ने 1999 में ‘फालुन दफा’ को प्रतिबंधित कर दिया था और इसका अभ्यास करने वाले लोगों को जेल में डाल दिया था
  • ‘‘फालुन दफा’ के प्रचारकों के अनुसार उनका ध्येय चीन में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में लोगों को जागरूक करना है

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