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सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार के. सुब्रमण्यन बोले- कैश नहीं, नौकरियां देने से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था

उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर नौकरियों के अवसर पैदा होने के चलते डिमांड में इजाफा होगा। ऐसा लोगों के हाथों में कैश देने से नहीं होगा। जरूरी यह है कि लोगों की आय सुनिश्चित की जाए। रोजगार के अवसर पैदा होने के चलते ही मांग बढ़ेगी।

k subramanianमुख्य आर्थिक सलाहकार के. सुब्रमण्यन

अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए लोगों के हाथों में सिर्फ कैश पहुंचाना ही काफी नहीं है। इसके लिए उन्हें रोजगार देना होगा। केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने एक इंटरव्यू में यह राय जताई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से गुरुवार को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत तीसरा पैकेज जारी किए जाने को लेकर यह बात कही। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में पहले ही कुछ तेजी देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा, ‘लोगों के हाथों में कैश देने से मांग में इजाफा नहीं होगा। नौकरियों के अवसर पैदा करने के जो ऐलान किए गए हैं, उनसे मांग बढ़ेगी। कोरोना संकट के खत्म होने के बाद स्थितियों का आकलन किया जाएगा।’

उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर नौकरियों के अवसर पैदा होने के चलते डिमांड में इजाफा होगा। ऐसा लोगों के हाथों में कैश देने से नहीं होगा। जरूरी यह है कि लोगों की आय सुनिश्चित की जाए। रोजगार के अवसर पैदा होने के चलते ही मांग बढ़ेगी। मुख्य आर्थिक सलाहकार के. सुब्रमण्यन ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग के डाटा से पता चलता है कि अब रिकवरी हो रही है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों के लिए सरकार को क्रेडिट दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘भारत पहला ऐसा देश है, जहां इस संकट के दौर में भी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रभावित नहीं हुआ है।’

कोरोना वायरस के संकट को लेकर सुब्रमण्यन ने कहा कि देश को सावधान रहना होगा और अवसरों को भुनाना होगा। उन्होंने कहा कि हमें कोरोना की दूसरी लहर को लेकर सावधानी रखनी होगी। खासतौर पर फेस्टिव सीजन में इस रिस्क को लेकर सचेत रहना होगा। सुब्रमण्यन ने कहा कि कोरोना काल में भी हॉस्पिटैलिटी और टूरिज्म सेक्टर में सोशल डिस्टेंस के नियमों का पालन करते हुए काम करना होगा।

बांग्लादेश की ग्रोथ से भारत की तुलना किए जाने पर के. सुब्रमण्यन ने कहा कि जब प्रति व्यक्ति आय की बात होती है तो भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है। हमें भारत और बांग्लादेश के बीच तुलना करते हुए आंकड़ों का सटीक अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि डाटा यह बताता है कि कोरोना संकट को मैनेज करने में हमने अच्छा प्रदर्शन किया है। इन सुधारों के चलते अर्थव्यवस्था के प्राइमरी और सेकंडरी सेकटर्स में तेजी देखने को मिल रही है। भविष्य में रोजगार के अवसरों में इजाफा होगा तो फिर मांग भी बढ़ेगी।

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