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चैक बाउंस मामला: किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व अधिकारी को 18 महीने की जेल

मामला जीएमआर हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट लि. (जीएचआईएएल) को किंगफिशर एयरलाइंस लि. द्वारा दिए गए चैक से जुड़ा है।

Author हैदराबाद | September 22, 2016 6:16 PM
कर्ज की वजह से किंगफिशर एयरलाइन्स की सेवा बंद है। (फाइल फोटो)

एक स्थानीय अदालत ने चैक बाउंस के दो मामलों में किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व सीएफओ ए रघुनाथन को गुरुवार (22 सितंबर) को 18 महीने जेल की सजा सुनाई। जीएमआर हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट लि. ने रघुनाथन और शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ चैक बाउंस को लेकर मामला दर्ज कराया था। विशेष अदालत के मजिस्ट्रेट एम कृष्ण राव ने रघुनाथन पर प्रत्येक मामले में 20,000-20,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया। इससे पहले, कई मौकों पर सजा की अवधि पर सुनवाई को टाल दिया गया था क्योंकि रघुनाथन के खिलाफ वारंट लंबित था। अदालत ने 20 अप्रैल को ‘परक्राम्य लिखत यानी नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट’ की संबंधित धाराओं के तहत 50-50 लाख रुपए के दो चैक बाउंस मामलों में किंगफिशर एयरलाइंस, माल्या तथा रघुनाथन को दोषी ठहराया था। मामला जीएमआर हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट लि. (जीएचआईएएल) को किंगफिशर एयरलाइंस लि. द्वारा दिए गए चैक से जुड़ा है। किंगफिशर की ओर से ये चैक हवाईअड्डे पर किंगफिशर एयरलाइंस के उड़ानों के लिए सुविधाओं के उपयोग के लिए दिए थे। जीएसआईएएल राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा का परिचालन करती है।

जीएचआईएएल के वकील जी अशोक रेड्डी ने कहा कि पांच महीने बाद रघुनाथन अंतत: अदालत के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने आगे कहा कि विजय माल्या देश से बाहर चले गए हैं और रघुनाथन के खिलाफ सजा सुनाने का अनुरोध किया। रघुनाथन के वकील ने कहा कि विभिन्न अदालतों ने कई वारंट जारी किए थे और वह इस अदालत के समक्ष उपस्थित होने में असमर्थ थे। उन्होंने रघुनाथन के खिलाफ मामले को अलग करने का अनुरोध किया। उन्हें पिछले कुछ दिनों में गैर-जमानती वारंट के लिए विभिन्न अदालतों में उपस्थित होना पड़ा। उसके बाद वह उच्च न्यायालय गए और वारंट को वापस लिया गया। रेड्डी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने साफ किया कि उसका गैर-जमानती वारंट वापस लेने का आदेश मामले में सजा पर दिए गए फैसले के रास्ते में नहीं आएगा। इससे पहले, अदालत ने दो चैक बाउंस होने के मामले में किंगफिशर एयरलाइंस, उसके चेयरमैन माल्या तथा रघुनाथन के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

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