यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) ने अपने कर्मचारियों के मेडिकल क्लेम के रीइंबर्समेंट को लेकर सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) से कई मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। मेडिकल क्लेम की जांच के दौरान कुछ नियमों को लेकर बार-बार दिक्कतें सामने आ रही थीं। UPSC के मुताबिक, इसकी एक वजह CGHS के मौजूदा निर्देशों में स्पष्टता की कमी थी।

अब CGHS ने इन मामलों पर जवाब देते हुए कंसल्टेशन, टेस्ट, इन्वेस्टिगेशन, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन, डायग्नोसिस, आई कंसल्टेशन फीस और इलाज से पहले विभागीय अनुमति जैसे कई मुद्दों पर क्लैरिफिकेशन दिया है। 11 अगस्त 2026 के ऑफिस मेमोरेंडम (OM) में UPSC ने इन जानकारियों को साझा किया है। आइए जानते हैं कि CGHS ने UPSC के बेनिफिशियरी कर्मचारियों के लिए क्या-क्या स्पष्ट किया है…

उसी हॉस्पिटल में फॉलो-अप इलाज

CGHS का कहना है कि अगर कोई CGHS बेनिफिशियरी प्राइमरी कंसल्टेशन के लिए किसी एम्पैनल्ड हॉस्पिटल में जाता है, तो उसके बाद के फॉलो-अप कंसल्टेशन, जांच या छोटे-मोटे प्रोसीजर भी उसी हॉस्पिटल में होने चाहिए।

3000 रुपये तक के टेस्ट के लिए निर्देश

अगर किसी एम्पैनल्ड हॉस्पिटल के स्पेशलिस्ट डॉक्टर ने 3000 रुपये तक की कोई जांच लिखी है, तो उसे उसी हॉस्पिटल में करवाना चाहिए जहां बेनिफिशियरी प्राइमरी कंसल्टेशन के लिए गया था।

दूसरे CGHS हॉस्पिटल में किए जाने वाले टेस्ट

कोई CGHS बेनिफिशियरी उस CGHS-एम्पैनल्ड हॉस्पिटल या डायग्नोस्टिक सेंटर के अलावा किसी दूसरे हॉस्पिटल या डायग्नोस्टिक सेंटर में जांच करवाना चाहे जहां वह प्राइमरी कंसल्टेशन के लिए गया था। OM में कहा गया है कि ऐसे मामलों में CGHS वेलनेस सेंटर से पहले रेफरल जरूरी है।

जांच, कंसल्टेशन और प्रोसीजर के नियम

3000 रुपये से ज्यादा की CT, MRI और PET जैसी जांच के लिए CGHS रेफरल जरूरी होगा। कंसल्टेशन उसी स्पेशियलिटी में 7 दिनों तक वैलिड रहेगा। इसके अलावा, आंखों की कंसल्टेशन फीस में रिफ्रेक्शन, टोनोमेट्री और फंडस जांच शामिल हैं। साथ ही, अनलिस्टेड जांच या प्रोसीजर के लिए संबंधित विभाग से पहले अनुमति लेनी होगी।

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