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केंद्र सरकार ने पांच साल के लिए महंगाई का लक्ष्य 4% तय किया

अधिसूचना में मुद्रास्फीति का लक्ष्य चार प्रतिशत रखा गया है।
Author नई दिल्ली | August 5, 2016 19:37 pm
बाज़ार में सब्जी विक्रेता अपनी दुकान पर। (चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।)

नई व्यवस्था की ओर बढ़ते हुए सरकार ने अगले पांच साल के लिए मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) के दायरे में रखने के लक्ष्य को शुक्रवार (5 अगस्त) को अधिसूचित किया। आगे चलकर ब्याज दरों को निर्धारित करने वाली नई समिति इसी के आधार पर मौद्रिक नीति फैसले करेगी। रिजर्व बैंक के साथ मौद्रिक नीति रूपरेखा करार के तहत यह लक्ष्य तय किया गया है। केंद्र ने रिजर्व बैंक के साथ परामर्श कर के मुद्रास्फीति यह दायरा तय किया है जो मार्च, 2021 तक की अवधि के लिए है। इस कदम के तहत 2021 तक मुद्रास्फीति का लक्ष्य चार प्रतिशत तय किया गया है। इसके दो प्रतिशत ऊपर या नीचे होने की गुंजाइश रखी गई है। इस तरह ऊपरी स्तर पर मुद्रास्फीति का लक्ष्य छह प्रतिशत तय किया गया है। सरकार ने इस तरह से रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के मुद्रास्फीति-मौद्रिक नीति का पहला मॉडल पर अपनी मोहर लगा दी है।

वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि वृद्धि के लक्ष्य पर विशेष जोर देते हुए तथा लगातार जटिल होती अर्थव्यवस्था में चुनौतियों को देखते हुए मुद्रास्फीति का लक्ष्य तय करना एक महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति सुधार है। इस आवश्यक सांविधिक समर्थन भी दिया गया है। संसद में रखी गई सरकार की अधिसूचना में कहा गया है, ‘रिजर्व बैंक कानून 1934 की धारा 45जेडए के तहत मिले अधिकारों के तहत केंद्र सरकार ने बैंक के साथ विचार विमर्श के बाद अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से 31 मार्च, 2021 तक के लिए मुद्रास्फीति का यह लक्ष्य तय किया है।’ अधिसूचना में मुद्रास्फीति का लक्ष्य चार प्रतिशत रखा गया है। यह इससे दो प्रतिशत ऊपर यानी छह प्रतिशत या दो प्रतिशत नीचे यानी दो प्रतिशत तक भी हो सकती है।

सरकार और रिजर्व बैंक ने पिछले साल फरवरी में मौद्रिक नीति रूपरेखा करार किया था, जिसके तहत रिजर्व बैंक नीतिगत दरें तय करेगा और जनवरी, 2016 तक मुद्रास्फीति को छह प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य लेकर चलेगा। इसके बाद 2016-17 तथा आगे के वर्षों केलिए इसे चार प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) तय किया गया है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जून में बढ़कर 5.77 प्रतिशत हो गई, जो 22 माह की सबसे तेज रफ्तार है। माना जा रहा है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन से मुद्रास्फीति और ऊपर जाएगी। बयान में कहा गया है कि यदि औसत मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों में ऊपरी स्तर 6 प्रतिशत से अधिक या निचले स्तर 2 प्रतिशत से कम रहती है, तो इसे मुद्रास्फीति लक्ष्य हासिल करने में विफलता माना जाएगा।

सरकार ब्याज दर तय करने वाली छह सदस्यीय समिति के गठन की प्रक्रिया में है। 9 अगस्त की मौद्रिक समीक्षा राजन की आखिरी मौद्रिक नीति बैठक होगी। राजन का तीन साल का कार्यकाल 4 सितंबर को पूरा हो रहा है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बहुमत के आधार पर ब्याज दरें तय करेगी। बराबरी होने पर रिजर्व बैंक के गवर्नर मतदान करेंगे। छह सदस्यीय समिति में से तीन रिजर्व बैंक से होंगे। गवर्नर समिति के पदेन चेयरपर्सन होंगे। इसके अलावा समिति में एक डिप्टी गवर्नर तथा एक कार्यकारी निदेशक होगा। अन्य तीन सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा कैबिनेट सचिव की अगुवाई वाली खोज एवं चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर की जाएगी।

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