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गेहूं पर आयात शुल्क में कटौती कर सकती है सरकार, एफसीआई के स्टॉक पर कम होगा बोझ

आयात शुल्क कम करने से आटा मिलें विदेशों से गेहूं मंगा सकेंगे, मौजूदा समय में एफसीआई के पास 2.42 करोड़ टन का गेहूं का स्टॉक है।
Author नई दिल्ली | September 18, 2016 18:00 pm
गेहूं की बालियां (चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है)

गेहूं के घरेलू उत्पादन में कमी आने के मद्देनजर इसकी घरेलू आपूर्ति को बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार गेहूं पर आयात शुल्क को घटाकर 10 प्रतिशत या 15 प्रतिशत करने पर विचार कर रही है, जिससे घरेलू आपूर्ति बढ़ाई जा सकी। मौजूदा समय में गेहूं के आयात पर 25 प्रतिशत का शुल्क लगता है और आटा मिलों ने इसे वापस लिए जाने की मांग की है। खाद्य मंत्रालय भी आयात कर को कम करने के पक्ष में है क्योंकि वह कृषि मंत्रालय द्वारा अधिक उत्पादन अनुमान व्यक्त किये जाने के बावजूद सरकारी उपक्रम एफसीआई द्वारा कम गेहूं खरीद को लेकर चिंतित है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘सरकार गंभीरता से गेहूं के आयात शुल्क में कटौती पर विचार कर रही है।’ उन्होंने कहा कि यद्यपि उद्योग जगत गेहूं पर आयात शुल्क को वापस लिए जाने की मांग कर रहा है लेकिन ऐसी चर्चा है कि इसे घटाकर या तो 10 प्रतिशत या 15 प्रतिशत कर दिया जाए। इस संबंध में फैसला जल्द लिया जाएगा। हालांकि गेहूं की कीमतें स्थिर हैं और फिलहाल आयात शुल्क को कम करने का कोई मामला नहीं है लेकिन सरकार अभी से इस मामले में गौर कर रही है क्योंकि एफसीआई का स्टॉक कम हो रहा है।
भारतीय खाद्य निगम में गेहूं का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है क्योंकि बाजार में कमी के कारण निजी आटा मिलें निगम से खरीद बढ़ा रही हैं।

अभी तक एफसीआई ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के जरिए 20 लाख टन से भी अधिक गेहूं की बिक्री की है जो हाल के दिनों में सर्वाधिक है। एमसीआई आगे और बिक्री नहीं करना चाहता क्योंकि उसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए स्टॉक का स्तर बनाए रखना है। इसके अलावा कृषि मंत्रालय द्वारा वर्ष 2015-16 में 9.35 करोड़ टन के अधिक उत्पादन होने के अनुमान के बावजूद इस वर्ष एफसीआई की गेहूं खरीद का स्तर कम यानी 2.29 करोड़ टन ही है। पिछले वर्ष आठ करोड़ 65.3 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ था।

इस बीच व्यापारियों और आटा मिलों ने घरेलू उत्पादन में 50 लाख टन की कमी आने का अनुमान लगाया है। उन्होंने पहले ही ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और यूक्रेन से इस वर्ष 8,25,000 टन गेहूं की आपूर्ति के लिए अनुबंध कर रखा है। पिछले साल भी निजी आटा मिलों ने एक दशक में पहली बार ऑस्ट्रेलिया से करीब पांच लाख टन गेहूं की खरीद की थी। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार का व्यवहार स्टॉक की कमी का संकेत देता है इसलिए आटा मिलें एफसीआई से और अधिक अनाज खरीद रही हैं और बेहतर उत्पादन अनुमान के बावजूद भी आयात कर रही हैं। आयात शुल्क कम करने से आटा मिलें विदेशों से गेहूं मंगा सकेंगे और एफसीआई के स्टॉक पर बोझ कम होगा। मौजूदा समय में एफसीआई के पास 2.42 करोड़ टन का गेहूं का स्टॉक है।

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