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ईपीएफ मुद्दे पर फंसी सरकार

ईपीएफ निकासी पर कर लगाने के प्रस्ताव को लेकर हो रही तीखी आलोचना के बीच केंद्र सरकार दुविधा में दिख रही है।
Author नई दिल्ली | March 3, 2016 01:09 am
लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अरुण जेटली। (पीटीआई फोटो)

ईपीएफ निकासी पर कर लगाने के प्रस्ताव को लेकर हो रही तीखी आलोचना के बीच केंद्र सरकार दुविधा में दिख रही है। विवादास्पद प्रावधान का वास्तविक स्वरूप अभी तक स्पष्ट नहीं है। कोई नए प्रावधान को ईपीएफ कोष से निकासी पर टैक्स बता रहा है तो कोई ईपीएफ पर मिले ब्याज की राशि पर टैक्स। हां, नए प्रावधान के पीछे सरकार की मंशा जरूर साफ नजर आती है। उसकी नई पेंशन योजना को लोग अपनाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। वजह है- असुरक्षा का भाव। क्योंकि उसका निवेश शेयर बाजार में होगा। जहां बढ़त के बजाय घाटे की आशंका को भी नकारा नहीं जा सकता। शायद इसीलिए जहां एनपीएस को आकर्षक बनाने के लिए उसमें निवेश पर छूट दी गई है, वहीं ईपीएफ से निवेशकों का मोहभंग करने की मंशा से उससे हुई निकासी का टैक्स लगाया है।

बहरहाल चौतरफा विरोध से सरकार दबाव में आई है। तभी तो वित्त मंत्री अरुण जेटली को बुधवार को लोकसभा में कहना पड़ा कि सरकार ने इस मुद्दे का संज्ञान लिया है और बजट पर चर्चा के दौरान वे इसका समाधान करेंगे। तृणमूल कांग्रेस सदस्य सौगत राय की ओर से इस मामले को उठाए जाने के बीच सदन में मौजूद वित्त मंत्री ने तुरंत यह घोषणा की। अध्यक्ष सुमित्रा महाजन द्वारा अनुमति दिए जाने के बाद इसी पार्टी के सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि ईपीएफ पर कर लगाने के प्रस्ताव से राष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा हो गई है।

जेटली ने अपने संक्षिप्त हस्तक्षेप में कहा- हमने समस्या का संज्ञान लिया है। मैं बजट पर चर्चा के दौरान इसे देखूंगा। इससे पहले दिन में औद्योगिक चैंबर्स की एक बैठक में भी जेटली ने इसी तरह की बात कही थी। साथ ही उन्होंने कहा था कि जब वे संसद में बजट सत्र पर बहस के दौरान बोलेंगे तो इस मामले पर अंतिम फैसले की व्याख्या करेंगे। बजट 2016-17 में सरकार ने प्रस्ताव किया है कि एक अप्रैल के बाद कर्मचारी भविष्य निधि कोष (ईपीएफ) में जो योगदान किया जाएगा, निकासी के समय उसका 60 फीसद कोष कर के दायरे में आएगा। सरकार ने मंगलवार को संकेत दिया था कि इस प्रस्ताव को आंशिक रूप से वापस लिया जा सकता है।

उद्योग मंडलों के साथ बजट प्रावधानों पर बैठक के दौरान जेटली ने बुधवार को कहा कि यह कदम ऊंचे वेतन पाने वाले लोगों को लक्ष्य कर उठाया गया है। यह ईपीएफ सदस्यों में से 3.7 करोड़ पर लागू नहीं होगा। राजस्व विभाग ने राष्ट्रीय पेंशन योजना और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया है। उनकी मंशा राजस्व बढ़ाने की नहीं है, यह प्रमुख मंशा नहीं है। इस कदम के पीछे मंशा अधिक बीमित और पेंशन वाले समाज का सृजन है। बजट प्रावधानों में यह व्यवस्था है कि यदि ईपीएफ निकासी को पेंशन आधारित कोषों में निवेश किया जाता है तो उस पर कोई कर नहीं लगेगा।

उन्होंने कहा कि ईपीएफओ के अंशधारकों की संख्या 3.7 करोड़ है। इनमें से तीन करोड़ सदस्य ऐसे हैं जिनकी 15,000 रुपए या उससे कम सांविधिक वेतन पाने वाले हैं और इस श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों की ईपीएफ कोष की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इससे सिर्फ वे निजी क्षेत्र के कर्मचारी प्रभावित होंगे जो अभी इसमें शामिल हुए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी भारतीय मजदूर संघ सहित कई यूनियनों और विपक्षी दलों ने इसे कर्मचारी वर्ग पर हमला बताते हुए इस प्रस्ताव का विरोध किया है। सरकार ने कहा कि यह प्रस्ताव केवल कोष के ब्याज आय तक सीमित है।

जेटली ने कहा कि इस पर अब कुछ प्रतिक्रिया हुई है। संसद में बहस के समय मैं सरकार की ओर से इसका जवाब दूंगा कि इस पर अंतिम फैसला क्या होगा। जेटली ने कहा कि इस प्रस्ताव के पीछे मकसद यह है कि 40 फीसद निकासी पर कोई कर न लगे। इसका इस्तेमाल सेवानिवृत्ति के समय की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में किया जा सकता है।

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