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किसानों से सीधी दलहनों की खरीद करेगी सरकारी एजेंसियां

मौजूदा समय में दलहन की खुदरा कीमत 115 से 170 रुपए किलो के दायरे में है जबकि इसके थोक बिक्री मूल्य में गिरावट आ चुकी है।

Author नई दिल्ली | September 8, 2016 6:46 PM
पिछले वित्त वर्ष (2015-16) में करीब 55 लाख टन दाल का आयात किया गया था। (पीटीआई फोटो)

सरकार ने गुरुवार (8 सितंबर) को नाफेड सहित खरीद एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे दलहन की सस्ती आपूर्ति करने और उत्पादकों को समर्थन मूल्य देना सुनिश्चित करने के मकसद से तैयार किए जा रहे बफर स्टॉक के लिए सभी उत्पादक राज्यों के किसानों से तुअर, उड़द और मूंग की सीधी खरीद करें। मंत्रिमंडलीय सचिव पी के सिन्हा ने गुरुवार को आवश्यक जिसों की कीमतों और उनकी उपलब्धता, विशेषकर दलहनों की, की समीक्षा करने के लिए एक बैठक की और सभी संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वे निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ करें तथा त्यौहारों के दौरान इन जिसों की सस्ते दर पर उपलब्धता को सुनिश्चित करें।

एक सरकारी बयान में कहा गया है, ‘सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी दलहन उत्पादक राज्यों में किसानों से दलहनों की सीधी खरीद को विस्तार करें।’ नाफेड के अलावा लघु कृषक कृषि व्यवसाय परिसंघ (एसएफएसी) तथा भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) भी दलहनों की खरीद का काम कर रहे हैं। इन एजेंसियों ने कर्नाटक और महाराष्ट्र में मूंग की खरीद शुjt कर दी है और वे जल्द ही बाजार में आवक के आधार पर अपनी खरीद का विस्तार करेंगे। उन्हें 15 सितंबर से उड़द की खरीद करने का निर्देश दिया गया है और बाजार में आवक के तत्काल बाद तुअर की खरीद करने का निर्देश दिया गया है।

कुछ स्थानों पर मूंग की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के नीचे जाने के कारण मूंग की खरीद शुjt की गई थी। बयान में कहा गया, ‘सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को आगामी त्यौहारी सत्र के दौरान सस्ते दरों पर इन जिसों की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए अपनी निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ करने का निर्देश दिया गया है।’ बैठक में उपभोक्ता मामला विभाग, खाद्य विभाग, राजस्व विभाग, वाणिज्य मंत्रालय और संबंधित मंत्रालयों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

भारत का दलहन उत्पादन फसल वर्ष 2015..16 में उससे पिछले वर्ष के एक करोड़ 71.5 लाख टन से घटकर एक करोड़ 64.7 लाख टन रह गया। सूखे के कारण पिछले दो फसल वर्षो में दलहनों का उत्पादन कम रहा है जिसके कारण खुदरा कीमतों में तेजी आई है। हालांकि वर्ष 2016-17 में दलहन का उत्पादन बढ़कर दो करोड़ टन हो जाने की उम्मीद है क्योंकि बेहतर मानसून, अधिक बाजार मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भारी वृद्धि के कारण किसानों ने अधिक रकबे में इस फसल को लगाया है। केन्द्र सरकार ने कीमत बढ़ने के समय बाजार हस्तक्षेप करने और सस्ते दरों पर दलहनों की आपूर्ति करने के मकसद से आयात के साथ साथ घरेलू खरीद करने के जरिए 20 लाख टन दलहन का बफर स्टॉक बनाने का फैसला किया है।

मौजूदा समय में दलहन की खुदरा कीमत 115 से 170 रुपए किलो के दायरे में है जबकि इसके थोक बिक्री मूल्य में गिरावट आ चुकी है। सरकार को दलहन कीमतों में शीघ्र ही कमी आने की उम्मीद है। पिछले सप्ताह खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा था कि दलहनों की थोक बिक्री कीमत में क्रमश: गिरावट आनी शुरू हुई है और इसका असर खुदरा बाजार में जल्द ही परिलक्षित होना शुरू होगा क्योंकि बाजार में नई फसल के आने के साथ जमाखोर अधिक समय तक अपने स्टॉक को बनाए नहीं रख पाएंगे।

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