Centralized vs Decentralized Exchange: अगर आप किसी क्रिप्टोकरेंसी जैसे Bitcoin, Ethereum को खरीदने या बेचने का सोच रहे हैं तो फिर सबसे पहले आपके दिमाग में यही ख्याल आएगा कि इसे कहां से खरीद सकते हैं या कहां बेच सकते हैं। आम तौर पर इसके लिए क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है।

हालांकि, सभी क्रिप्टो एक्सचेंज एक जैसे नहीं होते। इन्हें मुख्य रूप से दो कैटेगरी (Centralized Exchange और Decentralized Exchange) में बांटा जाता है। दोनों प्लेटफॉर्म पर क्रिप्टोकरेंसी खरीदी और बेची जा सकती है, लेकिन इनके काम करने का तरीका काफी अलग होता है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं…

क्या है सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज?

सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज ऐसा क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म होता है, जिसे कोई कंपनी या संस्था ऑपरेट करती है। यूजर इस प्लेटफॉर्म पर अपना अकाउंट बनाता है और फिर क्रिप्टोकरेंसी खरीद या बेच सकता है।

इसे शेयर बाजार के ब्रोकर प्लेटफॉर्म की तरह समझ सकते हैं। जिस तरह शेयर खरीदने और बेचने के लिए निवेशक किसी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, उसी तरह सेंट्रलाइज्ड क्रिप्टो एक्सचेंज खरीदार और विक्रेता के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभाता है।

आमतौर पर ऐसे एक्सचेंज पर यूजर को अकाउंट बनाना पड़ता है। कई प्लेटफॉर्म पहचान से जुड़ी केवाईसी प्रक्रिया भी पूरी कराते हैं। इसके बाद यूजर प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सुविधाओं के मुताबिक पैसा जमा करके क्रिप्टोकरेंसी को खरीद और बेच सकता है।

उदाहरण से समझें

मान लीजिए किसी व्यक्ति को बिटकॉइन खरीदना है। वह सबसे पहले किसी सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज में अकाउंट बनाना होगा। इसके लिए उसे जरूरी प्रक्रिया (जैसे- केवाईसी) पूरी करना होगा। इसके बाद उसे एक्सचेंज में पैसा एड करना होगा।

इसके बाद वह बिटकॉइन खरीद या बेच सकता है। यहां पूरी खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को एक्सचेंज का प्लेटफॉर्म मैनेज करता है यानी वह व्यक्ति सीधे किसी अनजान बिटकॉइन बेचने वाले व्यक्ति से संपर्क नहीं करता। एक्सचेंज बीच में रहकर ऑर्डर को पूरा कराने में मदद करता है।

क्या है डिसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज?

डिसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज का काम करने का तरीका अलग होता है। इस पर किसी केंद्रीय कंपनी या संस्था का उसी तरह सीधा नियंत्रण नहीं होता जैसा सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज पर होता है। आम तौर पर यह प्लेटफॉर्म ब्लॉकचेन नेटवर्क और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स की मदद से काम करते हैं।

यूजर अपने क्रिप्टो वॉलेट को प्लेटफॉर्म से कनेक्ट करके सीधे टोकन की अदला-बदली कर सकता है। आसान भाषा में कहें तो यहां ट्रेडिंग के लिए हर बार किसी केंद्रीय कंपनी के पास अपना क्रिप्टो जमा करना जरूरी नहीं होता।

उदाहरण से समझें

मान लीजिए किसी व्यक्ति के पास क्रिप्टो वॉलेट में एक टोकन मौजूद है और वह उसे दूसरे टोकन में बदलना चाहता है। वह अपने वॉलेट को डिसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज से कनेक्ट करता है और उपलब्ध विकल्पों के जरिए टोकन स्वैप करता है।

इसमें लेनदेन को किसी कंपनी के कर्मचारी द्वारा मैन्युअली मंजूरी देने के बजाय ब्लॉकचेन पर मौजूद प्रोग्राम किए गए नियमों के आधार पर पूरा किया जा सकता है।

सेंट्रलाइज्ड और डिसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज में क्या अंतर है?

सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज डिसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज
किसी कंपनी या संस्था द्वारा संचालित होता है।Blockchain Protocol और Smart Contracts के जरिए संचालित होता है, किसी एक संस्था का नियंत्रण नहीं होता।
यूजर के क्रिप्टो एसेट अक्सर एक्सचेंज के सिस्टम में रहते हैं।यूजर अपने निजी क्रिप्टो वॉलेट से ट्रेड करता है और प्राइवेट की पर उसका खुद का नियंत्रण रहता है।
नए यूजर्स के लिए अपेक्षाकृत आसान। इस्तेमाल के लिए क्रिप्टो वॉलेट,ब्लॉकचेन नेटवर्क और गैस फीस जैसी चीजों की बुनियादी समझ जरूरी हो सकती है।

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अगर आप क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करते हैं या क्रिप्टो सीख रहे है, तो आपने कई ऐसे शब्द जरूर सुने होंगे, जिनका मतलब शायद आपको पता न हो। हालांकि, क्रिप्टो की दुनिया को समझने के लिए इन शब्दों का मतलब जानना काफी जरूरी है। यहां पढ़ें पूरी खबर…

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