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सेंट्रल विस्टा पर विवाद बढ़ा, प्रोजेक्ट में टाटा की कंपनी को मिली है ये जिम्मेदारी

सेंट्रल विस्टा के तहत संसद भवन के निर्माण की जिम्मेदारी टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड को मिली हुई है। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट के लिए सात कंपनियों ने ठेके को हासिल करने के लिए बोली लगाई थी।

ratan tata, tata projects इस पूरे प्रोजेक्ट पर कुल अनुमानित खर्च 1200 करोड़ रुपये है। (Photo-PTI)

देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है , हर दिन मौत के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं। वहीं दिल्ली में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कंस्ट्रक्शन का काम किया जा रहा है।

दरअसल, प्रोजेक्ट में नए प्रधानमंत्री आवास का निर्माण होना है। इसकी डेडलाइन 2022 तय की गई है। यही नहीं, लॉकडाउन में भी इस प्रोजेक्ट का काम न रुके इसके लिए सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को आवश्यक सेवाओं के तहत रखा गया है।  ऐसे में अब इस कंस्ट्रक्शन का विपक्ष ने विरोध किया है। बहरहाल, आइए जानते हैं कि आखिर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट क्या है और इसके कंस्ट्रक्शन की जिम्मेदारी किस कंपनी को मिली है।

क्या है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट:  सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत नए संसद भवन का निर्माण किया जा रहा है। संसद भवन के अलावा इस प्रोजेक्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति भवन, मंत्रालय और आसपास के इलाकों का नवीनीकरण होगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर कुल अनुमानित खर्च 1200 करोड़ रुपये है।

संसद भवन प्रोजेक्ट किसे मिला: सेंट्रल विस्टा के तहत संसद भवन के निर्माण की जिम्मेदारी टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड को मिली हुई है। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट के लिए सात कंपनियों ने ठेके को हासिल करने के लिए बोली लगाई थी। वहीं, आखिरी चरण में तीन कंपनियों को चुना गया। इन कंपनियों में एलएंडटी, टाटा प्रोजेक्ट्स और शापूरजी पालोनजी एंड कंपनी शामिल थीं। हालांकि सबसे कम बोली टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड ने लगाई थी।

टाटा को ये प्रोजेक्ट 861 करोड़ रुपये में मिला है। आपको बता दें कि नए संसद भवन का डिजाइन HCP Design, योजना और प्रबंधन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया है। नया संसद भवन 64500 स्क्वायर मीटर में बनाया जाएगा। अनुमान के मुताबिक इस संसद भवन को 2022 तक तैयार किया जाएगा।

हाईकोर्ट में जनहित याचिका : अब इस प्रोजेक्ट को रोके जाने की मांग हो रही है। दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर कहा गया है कि महामारी की डरावनी हालत के बावजूद सेंट्रल विस्टा के कंस्ट्रक्शन को बंद न करना दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) के आदेश के खिलाफ है। (ये पढ़ें-कर्ज देती थी अनिल अंबानी की ये दो कंपनियां, फिर कारोबार समेटने की आ गई नौबत)

ऐसे में इस पर फौरन रोक लगनी चाहिए। याचिका में आशंका जाहिर की गई है कि अगर इस प्रोजेक्ट का निर्माण इसी तरह जारी रहा, तो यह कोरोना महामारी को बड़े पैमाने पर फैलाने वाला सुपर स्प्रेडर साबित हो सकता है। (ये पढ़ें-अडानी संभाल रहे हैं अंबानी का कारोबार)

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